
रांची, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। रांची में जारी खबर के अनुसार, झारखंड उच्च न्यायालय ने आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह के द्वारा दायर की गई डिस्चार्ज याचिका को खारिज कर दिया है। यह निर्णय न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद के अध्यक्षत्व में सुनवाई के दौरान हुआ।
मामला 4 नवंबर (हि.स.) के दिन दर्ज किया गया था, जिसमें बड़गांई के 8.86 एकड़ जमीन को लेकर एक व्यापक घोटाला सामने आया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने प्रारम्भ में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नेता अंतू तिर्की और आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह समेत अन्य जमीन व्यापारियों के ठिकानों पर जाँच के लिए छापे डाले। जांच पूरी होने पर, ईडी ने पीएमएलए की विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया, जिससे 17 आरोपितों के खिलाफ आरोप गठित हुए।
विनोद कुमार सिंह ने पहले ही इस आदेश को पीएमएलए की विशेष अदालत में चुनौती दी थी, और उस अदालत ने उनके डिस्चार्ज पिटीशन को खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने उसी आदेश को उच्च न्यायालय में अपील किया, जहाँ अदालत ने इस दावे को भी खारिज कर दिया।
न्यायालय की यह बात स्पष्ट कर दी गई कि विशेष अदालत के निर्णय को अपील के दौरान फिर से देखने की कोई गुंजाइश नहीं थी। इस फैसले से बड़गांई के जमीन घोटाले में संलिप्त व्यक्तियों की कानूनी स्थिति और स्पष्ट हुई, और यह दिखाया कि उच्च न्यायालय ने सबूतों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्णय लिया है।
