
नई दिल्ली, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। देश की प्रमुख फिनटेक स्टार्ट‑अप रेजर-पे को अपने पहले सार्वजनिक इश्यू (आईपीओ) के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी की हरी झंडी मिल गई है। कंपनी इस इश्यू के माध्यम से 5,500 करोड़ रुपये से 6,500 करोड़ रुपये तक की पूँजी जुटाने की योजना बना रही है।
रेजर‑पे ने जून 2026 में कॉन्फिडेंशियल प्री‑फाइलिंग रूट के तहत गुप्त रूप से सेबी को दस्तावेज़ जमा कराए थे, जिससे संवेदनशील वित्तीय जानकारी को सार्वजनिक किए बिना आईपीओ की शुरुआती प्रक्रिया पूरी की जा सके।
इस इश्यू के जरिए कंपनी का लक्ष्य लगभग 500 करोड़ डॉलर यानी लगभग 49,000 से 50,000 करोड़ रुपये का वैल्यूएशन हासिल करना है। यह मूल्यांकन कंपनी के पिछले मूल्यांकन से थोड़ा कम है; 2021 के एक फंडिंग राउंड में रेजर‑पे को 750 करोड़ डॉलर का वैल्यूएशन मिला था। कंपनी की स्थापना 2014 में आईआईटी रुड़की के पूर्व छात्र हर्षिल माथुर और शशांक कुमार ने की थी, और यह डिजिटल बैंकिंग, पेमेंट गेटवे तथा पेमेंट प्रोसेसिंग जैसी सेवाएँ व्यापारियों को प्रदान करती है।
इनकी प्रमुख निवेशकों में टाइगर ग्लोबल, पीक एक्सवी पार्टनर्स और जीआईसी जैसे बड़े ग्लोबल फंड शामिल हैं। प्रतिस्पर्धा में पेटीएम, पे‑यू, पाइन लैब्स, कैशफ्री पेमेंट्स और फोन‑पे जैसी कंपनियाँ शामिल हैं। इनमें से पाइन लैब्स और पेटीएम पहले से ही भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं, जबकि फोन‑पे के 2026‑27 के अंत तक लिस्ट होने की उम्मीद है।
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो वित्त वर्ष 2024‑25 में रेजर‑पे का कुल राजस्व वार्षिक आधार पर 65 प्रतिशत की तेज़ी से बढ़कर 3,783 करोड़ रुपये तक पहुँचा। उसी अवधि में ग्रॉस प्रॉफिट 1,277 करोड़ रुपये तक बढ़ा, परंतु कंपनी को 1,209 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा भी झेलना पड़ा।
घाटे के प्रमुख कारणों में कर्मचारियों के एंप्लॉयी स्टॉक ओनरशिप प्लान (ईएसलओपी) से जुड़े एकमुश्त खर्चे तथा कंपनी के डोमिसाइल को अमेरिका से भारत वापस लाने (रिवर्स‑फ्लिप) प्रक्रिया के दौरान उठी भारी कर देनदारी शामिल है। मई 2023 में रेजर‑पे ने अपनी अमेरिकी मूल कंपनी का भारतीय इकाई में विलय करके आधिकारिक तौर पर अपना पूरा आधार भारत में स्थानांतरित कर लिया था, जिससे अब वह भारतीय स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने के लिए पूरी तरह तैयार है।
