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हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया: तीन सेकंड की देरी पर दिव्यांग अभ्यर्थी को नाकाबिल न करें

रांची, 04 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। झारखंड उच्च न्यायालय ने दुमका के चौकीदार पद की नियुक्ति के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि “मात्र तीन सेकंड की देरी” के आधार पर किसी भी दिव्यांग अभ्यर्थी को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। यह निर्णय, जिसे विज्ञापन संख्या 01/2025 के तहत 328 पदों के लिए दायर किया गया था, विशेष रूप से इस तथ्य को सामने लाया कि दुमका में दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित 13 पदों में से 11 पद अभी भी रिक्त हैं।

मामले की मुख्य पीड़ित एक दिव्यांग अभ्यर्थी थी, जो लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण हुई थी। परंतु शारीरिक परीक्षा के दौरान उसे सामान्य अभ्यर्थियों के साथ दौड़ में शामिल किया गया और किसी प्रकार का अतिरिक्त समय या सुविधा नहीं दी गई। उसने दौड़ 10 मिनट 3 सेकंड में पूरी की, जबकि निर्धारित समय से मात्र तीन सेकंड अधिक लगने के कारण उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया।

अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने अदालत में दलील दी कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की अनुच्छेद 2(वाई) और अनुच्छेद 20 के तहत सरकार पर यह ज़िम्मेदारी है कि वह दिव्यांग अभ्यर्थियों को उचित सुविधा प्रदान करे। उन्होंने अपना तर्क मजबूत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के विकास कुमार बनाम यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन मामले का भी हवाला दिया।

राज्य सरकार ने तर्क दिया कि नियुक्ति प्रक्रिया के नियमों में अतिरिक्त समय देने का कोई प्रावधान नहीं है। परंतु उच्च न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि “किसी नियम या सरकारी अधिसूचना को संसद द्वारा बनाए गए कानून के प्रावधानों के विपरीत नहीं हो सकता।”

अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि दुमका में दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित 13 पदों में से 11 पद अभी भी रिक्त हैं। इस आधार पर उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को चौकीदार पद पर नियुक्ति का हकदार घोषित किया और संबंधित अधिकारियों को आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया।

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