
लखनऊ, 04 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह को आर्थिक बोझ से मुक्त करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को निरंतर विस्तारित किया है। पिछले नौ वर्षों में इस योजना के तहत कुल 5,88,693 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ है और अक्टूबर 2017 से 27 अक्टूबर 2026 तक सरकार ने इस कार्यक्रम पर 3,471.22 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। योजना के तहत पात्र परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ आवश्यक उपहार सामग्री भी प्रदान की जाती है, जिससे न केवल आर्थिक मदद मिलती है बल्कि सामाजिक सम्मान भी मिलता है।

समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक एवं योजनाधिकारी आरपी सिंह ने कहा कि यह पहल निर्धन माता‑पिता को अतिरिक्त कर्ज या बचत खर्च करने की चिंता से मुक्त करती है। वित्तीय वर्ष में विभिन्न जिलों से कुल 1,15,658 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 34,654 को स्वीकृति दी गई और 11,540 को अपात्र माना गया। शेष आवेदनों की पात्रता जांच जारी है।

संख्या में वृद्धि स्पष्ट है: 2017‑18 में 14,580 जोड़े, अगले दो वर्षों में क्रमशः 42,317 और 47,097 जोड़े, 2020‑21 में कोविड‑19 के दौरान 22,780 जोड़े, 2021‑22 में 49,644 जोड़े, 2022‑23 में पहली बार 1,00,874 से अधिक, 2023‑24 में 1,04,940, 2024‑25 में 95,448 और 2025‑26 में 76,522 जोड़े। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 27 अक्टूबर तक 34,491 जोड़ों का विवाह हो चुका है, जबकि कुल लक्ष्य 72,540 रखा गया है।

प्रति जोड़े कुल एक लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें 64,000 रुपये नवविवाहित महिला के बैंक खाते में, 21,000 रुपये वैवाहिक उपहार सामग्री पर और 15,000 रुपये आयोजन खर्च के लिए निर्धारित हैं। चयन प्रक्रिया में ई‑केवाईसी, ई‑डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से आय‑जाति प्रमाणपत्रों की पुष्टि और आधार‑आधारित भुगतान प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
जिलावार आँकड़े दिखाते हैं कि हरदोई में सबसे अधिक 1,385 जोड़े, उसके बाद सीतापुर में 1,335, फिर पीलीभीत में 1,271 और आज़मगढ़ में 1,242 जोड़े हुए हैं।
देवरिया के दुर्गेश चौरसिया ने कहा, “पहले हमें बेटी की शादी को लेकर बहुत तनाव था, पर योगी सरकार की इस योजना ने हमें आर्थिक बोझ से बचाया।” शाहनाज खातून ने भी योजना की सराहना करते हुए कहा, “सरकार सभी धर्मों को समान रूप से देख रही है और गरीब परिवारों को पूरा सहयोग दे रही है।” इस प्रकार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बिना दबाव के नई जिंदगी की शुरुआत करने में मदद कर रही है।
