
ढाका (बांग्लादेश), 04 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। मीरपुर औद्योगिक क्षेत्र तीन दिनों से चल रहे कपड़ा उद्योग कर्मचारियों की 30 हजार टका न्यूनतम वेतन की माँग के कारण अशांत हो गया है। आज सुबह से लेकर दोपहर तक कर्मचारियों और पुलिस के बीच बार-बार झड़पें हुईं, जिससे मीरपुर-10, मीरपुर-2, मीरपुर-14 और मीरपुर-11 के हिस्से युद्ध के मैदान जैसा दिखने लगे।
कई निवासियों का कहना है कि “रविवार से ही यह इलाका किसी युद्ध क्षेत्र जैसा लग रहा है। सुबह ठीक से जागने से पहले ही साउंड ग्रेनेड की तेज आवाजें और आंसू गैस की तीखी गंध ने जीना दूभर कर दिया है।” यह बयान आबू हनीफ ने दिया, जो मीरपुर के पुराबी इलाके में रहते हैं।
दूसरे ओर, शरीफुल इस्लाम ने बताया कि आम लोग डर के साये में अपने घरों से बाहर निकलने से कतराते हैं। उन्होंने कहा, “पुलिस प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर रही है और लोगों से पूछताछ करने के लिए गलियों में घुस रही है। इससे पूरे इलाके में दहशत है।”
कौसर, एक निवासी, ने जोड़ा, “इन विरोध प्रदर्शनों और झड़पों के बीच कोई भी शांति से नहीं रह पा रहा है। इसलिए हर कोई डर के साये में है।” वहीं, गृहिणी शरीफा बेगम ने बताया, “हमें डरते-डरते बाहर निकलना पड़ता है। कल मैं एक बार बाहर गई थी, लेकिन तुरंत घर लौटना पड़ा। उसके बाद से मैं बाहर नहीं जा पायी हूँ। हर तरफ डर का माहौल है।”
स्थानीय दुकानदारों ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने चाय की दुकानों और सड़क किनारे बड़ी दुकानों को बंद रखने का निर्देश दिया है। कर्मचारियों ने कई दिनों से 30,000 टका के न्यूनतम मासिक वेतन की माँग की है। रविवार को प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के वाहन में आग लगा देने के बाद आंदोलन हिंसक हो गया।
मीरपुर में मंगलवार सुबह फिर से तीखी झड़पें हुईं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले और साउंड ग्रेनेड छोड़े। पुलिस का कहना है कि सोमवार को लगभग छह लोगों को उपद्रव फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पिछले दो दिनों में हुई झड़पों के लिए 11 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 10,000 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया है।
