
बलरामपुर, 03 नवंबर (हि.स.)—छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ ने पीवी ऐप की व्यावहारिक समस्याओं, वेतन विसंगति, पदोन्नति सहित लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रखा है। सोमवार को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर जहाँ जिले में राज्योत्सव का जश्न मनाया जा रहा था, वहीं पटवारी अपनी मांगों और सरकार की कार्रवाई के विरोध में धरने पर बने रहे। इस दौरान उन्होंने शाम को निलंबन आदेशों की प्रतियाँ जलाकर विरोध व्यक्त किया। पटवारियों का कहना है कि मांगों का समाधान करने के बजाय सरकार उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है।
शासन ने इस हड़ताल के बीच पटवारियों को काम पर लौटने का निर्देश दिया। नरेंद्र दुग्गा, संभागायुक्त, ने सरगुजा संभाग के सभी छह जिलों के एसडीएम को निर्देश दिया कि धरने पर पड़े पटवारियों को नोटिस जारी कर तत्काल कर्तव्य पर उपस्थित हों। यदि निर्धारित तिथि पर मुख्यालय में उपस्थित नहीं होते और स्पष्टीकरण नहीं देते तो एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई। बलरामपुर जिले के 150 पटवारियों को शो‑कोज नोटिस जारी किए गए हैं।
पहले वाड्रफनगर के पाँच पटवारियों के निलंबन की कार्रवाई की गई थी क्योंकि वे मुख्यालय में नहीं रह रहे थे। इसके बाद रामानुजगंज एसडीएम ने रिनू पटेल, अनिल भगत और रजनी सरोज खलखो सहित तीन पटवारियों को निलंबित किया। कुसमी क्षेत्र से भी तीन पटवारियों के निलंबन की सूचना संघ को मिली।

पटवारियों के आंदोलन से धान गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे और राजस्व विभाग के अन्य प्रमुख कार्य प्रभावित हो रहे हैं। विनय पांडेय, प्रांतीय प्रवक्ता, ने कहा कि 13 अक्टूबर से आंदोलन चल रहा है और सरकार ने 1 नवंबर को प्रांताध्यक्ष को निलंबित कर दिया, जिससे जिले के अध्यक्ष धीरेन्द्र उर्मालिया सहित चार अन्य पटवारियों को भी निलंबन का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मांगों पर चर्चा करने के बजाय बार‑बार कार्रवाई कर रही है।
संघ के जिलाध्यक्ष धीरेन्द्र उर्मालिया ने प्रमुख मांगों में पीवी ऐप की समस्याओं का समाधान, वेतन विसंगति का निवारण, राजस्व निरीक्षक (आरआई) पद पर पदोन्नति और निलंबित पटवारियों की बहाली का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पटवारी पद पर भर्ती हुए कई कर्मचारी उसी पद से ही सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि अन्य राजस्व कर्मचारियों को पदोन्नति के अवसर मिलते हैं।
सुरभि दास, तहसील अध्यक्ष, ने कहा कि पीवी ऐप की तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं से किसानों को भी कठिनाई हो रही है; किसानों के फोन पर आने वाली शिकायतों का समाधान उनके पास नहीं है, जिससे उत्तर देना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने वेतन विसंगति और सीमित पदोन्नति के मुद्दे को उजागर किया, यह कहते हुए कि उनके पिता भी पटवारी के पद पर भर्ती थे और उसी पद से सेवानिवृत्त हुए। वर्तमान में सरकार और पटवारी संघ के बीच मांगों को लेकर गतिरोध बना हुआ है, और आंदोलन आज भी जारी है।
