
नई दिल्ली, 04 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को घोषित किया कि पीयूष गोयल ने बायोइकोनॉमी को गति देने के उद्देश्य से नियामकीय मंजूरी प्रक्रियाओं को तेज करने, स्टार्ट‑अप्स के लिए फंडिंग को सरल बनाने और उद्योग व शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। यह बात उन्होंने वाणिज्य भवन, नई दिल्ली में आयोजित “भारत में बायोइकोनॉमी अवसर: नवाचार और विकास को बढ़ावा देने में स्टार्टअप्स की भूमिका” शीर्षक की उच्च‑स्तरीय गोलमेज बैठक के दौरान कही।
इस बैठक का आयोजन डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडस्ट्रियल इन्फॉर्मेशन एंड ट्रेड (डीपीआईआईटी) ने नीति आयोग और नीति फ्रंटियर टेक हब के सहयोग से किया था। इसमें नीति‑निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों और बायोफार्मा स्टार्ट‑अप्स ने भाग लिया, और उद्देश्य भारत की बायोइकोनॉमी के विकास को तेज करने के उपायों पर चर्चा करना था।

गोलमेज के दौरान गोयल ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता और उद्यमशीलता प्रतिभा को उपयोग में लाकर देश को बायोइकोनॉमी में वैश्विक अग्रणी बनाना आवश्यक है। उन्होंने तेज़ मंजूरी, बेहतर फंडिंग पहुंच, साझा बुनियादी ढांचा, और उद्योग‑शिक्षा‑सरकार के बीच मजबूत सहयोग को प्रमुख तत्व बताया।
गोलमेज से निकले सुझावों को निश्चित समय‑सीमा के भीतर लागू करने का आह्वान भी गोयल ने किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, फंडिंग तक पहुँच को सुविधाजनक बनाकर, पेटेंट मंजूरी में गति लाकर और घरेलू खरीद एवं अनुसंधान बुनियादी ढांचे को मजबूत करके स्टार्ट‑अप्स का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
गोयल ने अपने “एक्स” पर जारी पोस्ट में लिखा कि बायोफार्मा एवं बायोटेक्नोलॉजी स्टार्ट‑अप्स के साथ चर्चा में मुख्य चुनौतियों पर विचार हुआ और नई विकास संभावनाओं को खोलने के उपायों पर प्रकाश डाला गया। वह इस बात पर दृढ़ रहे कि सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों से ही भारत की बढ़ती बायो‑इकोनॉमी में ठोस योगदान संभव होगा।
