
प्रयागराज, 29 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दो पैन कार्ड मामलों में आज़म खान और उनके पुत्र अब्दुल्ला आज़म खान को जमानत प्रदान की और उनकी सजा निलंबित कर दी, परंतु दोषसिद्धि पर रोक लगाने की माँग को खारिज कर दिया। यह फैसला जस्टिस समित गोपाल की एकल बेंच ने सुनाया। दोनों ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को चुनौती देते हुए दोषसिद्धि पर रोक, सजा निलंबन तथा अंतरिम जमानत की मांग की थी।
आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म खान को 17 नवंबर 2025 को दो पैन कार्ड मामलों में कुल 7‑7 साल की सजा सुनाई गई थी और उसी दिन उन्हें रामपुर जिला जेल में भेज दिया गया। तब से वे 346 दिन (लगभग 11 महीने 12 दिन) कारावास में रहे। उन्होंने सेशन कोर्ट में अपील दायर की, पर 20 अप्रैल 2026 को अपील खारिज हुई और सजा बरकरार रही। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसका सुनवाई 15 अक्टूबर को हुई और हाईकोर्ट ने पहले अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
अब उच्च न्यायालय ने जमानत और सजा निलंबन की माँग स्वीकार कर ली है, जबकि दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार किया है। इस कारण दोनों की रिहाई अन्य लंबित मामलों की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि उन मामलों में पुलिस द्वारा बी‑वारंट नहीं लिया गया है और कोई अन्य कानूनी बाधा नहीं है, तो वे जेल से बाहर आ सकते हैं।
यह मामला अब्दुल्ला आज़म के दो पैन कार्ड में विभिन्न जन्मतिथियों के साथ उपयोग करने के आरोप से जुड़ा है, जिसमें चुनावी नामांकन के दस्तावेज़ों में दूसरे पैन कार्ड का प्रयोग किया गया था। निचली अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने चुनौती दी।
साथ ही, जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ी संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय ने 426.46 करोड़ रुपये मूल्य की अटैचमेंट की है, जबकि वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 1170 करोड़ रुपये बताया गया है। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, पूर्व कैबिनेट मंत्री आज़म खान और अन्य पर चल रहे जांच के हिस्से के रूप में की गई है।
