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नीट पेपर लीक मामला: 14वें आरोपी को दलीलें पेश करने का अंतिम अवसर, 29 अक्टूबर को सुनवाई

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। राऊज एवेन्यू कोर्ट में बुधवार को नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले के 14वें आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी (उर्फ राज सूर्यवंशी) की ओर से दलीलें प्रस्तुत नहीं की गईं। यह इस कारण से हुआ कि दिल्ली की अदालतों में वकीलों ने न्यायिक कार्य से बहिष्कार किया, जिससे दलीलें पेश करना असम्भव रहा। फास्ट‑ट्रैक कोर्ट के स्पेशल जज अजय गुप्ता ने सूर्यवंशी को 29 अक्टूबर को दलीलें पेश करने का अंतिम अवसर दिया।

न्यायालय ने 27 अक्टूबर को इस मामले के 14वें आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी उर्फ राज सूर्यवंशी के खिलाफ आरोप तय करने पर दलीलें सुनेगा। सीबीआई ने 14 अक्टूबर 2026 को सूर्यवंशी के विरुद्ध पूरक चार्जशीट दायर की थी। इससे पूर्व, 7 अक्टूबर को सीबीआई ने बताया था कि सूर्यवंशी के खिलाफ जांच चल रही है और उसे पूर्ण करने के लिये अधिक समय चाहिए। बुधवार को सुनवाई के दौरान सभी आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए।

न्यायालय अब आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने पर कार्य कर रहा है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने धनंजय लोखंडे की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 22 अगस्त को धनंजय लोखंडे के अरेस्ट मेमो की मांग करने वाली अर्जी को भी खारिज कर दिया। इससे पहले, 14 अगस्त को सीबीआई को इस मामले में आगे की जांच करने की अनुमति मिली थी, जबकि 12 अगस्त को न्यायालय ने सीबीआई द्वारा दायर चार्जशीट पर ध्यान दिया था, जिसमें कुल 13 आरोपी शामिल थे: यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवलदार।

सीबीआई ने आरोपितों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 315(5), 318(4), 61(2), 238, 303(2), भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) और 13(1)(ए), तथा पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट की धारा 10, 3, 4, 5 और 11 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने बताया कि इस मामले में 12 मई को एफआईआर दर्ज हुई, जिसके तुरंत बाद 72 अफसरों और आठ साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से जांच शुरू हुई। सीबीआई ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों के 92 स्थानों पर छापे मारते हुए 13 मई को पहली गिरफ्तारी की।

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