
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बुधवार को सुजल ग्राम संवाद का 12वां संस्करण आयोजित किया। इस मंच पर ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संचालन व रखरखाव में ग्राम पंचायतों की भूमिका, जलस्रोतों के संरक्षण तथा उपयोगकर्ता शुल्क के माध्यम से व्यवस्था को टिकाऊ बनाने की जरूरत पर ज़ोर दिया गया। इस कार्यक्रम में पाँच विभिन्न जिलों की पंचायतों के प्रतिनिधियों ने अपने‑अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम का संचालन अशोक केके मीणा द्वारा किया गया, जो पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव हैं। उनके साथ जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोअन तथा कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मीणा ने कहा कि पंचायतों को जल सेवा आकलन और स्वच्छ सेवा आकलन के माध्यम से नियमित रूप से सेवाओं की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने 16वें वित्त आयोग के अनुदान का प्रभावी उपयोग करने और उपयोगकर्ता शुल्क वसूलने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने का आग्रह किया।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की घालियां ग्राम पंचायत ने बताया कि जल जीवन मिशन से पहले गाँवों को बोरवेल और टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता था, पर अब छह गांवों में नियमित जलापूर्ति हो रही है और महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण दिया गया है। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले की इतोरे पंचायत में प्रत्येक परिवार से 62 रुपये मासिक शुल्क वसूल कर जल व्यवस्था चलायी जा रही है; यहाँ के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि स्कूलों और आंगनवाड़ी केन्द्रों को अब नल से सीधा पानी उपलब्ध कराया गया है।
दादरा एवं नगर हवेली की अथाल पंचायत ने पाइपलाइन जलापूर्ति के बाद स्वास्थ्य व जीवन स्तर में सुधार की सूचना दी। मिज़ोरम के खावजावल जिले की सियालहॉक पंचायत में प्रत्येक परिवार 150 रुपये मासिक शुल्क देता है, जिसका उपयोग रखरखाव कार्यों में होता है। नागालैंड के जुन्हेबोटो जिले की नाथा न्यू विलेज पंचायत ने कहा कि सभी घरों में नल कनेक्शन उपलब्ध है और जलग्रहण क्षेत्र में पौधरोपण कर जलस्रोत संरक्षण में योगदान दे रहे हैं।
समापन में सोअन ने कहा कि जल सेवाओं को दीर्घकालिक रूप से प्रभावी बनाए रखने हेतु जलस्रोत संरक्षण और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों एवं जिला प्रशासन से वित्त आयोग के अनुदान, राज्य योजनाओं और ग्राम पंचायत विकास योजनाओं के तहत जल संरक्षण, पारंपरिक जल निकायों के पुनर्जीवन और रखरखाव कार्यों की समन्वित योजना बनाने का आवाहन किया।
