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हिमालयी आपदाओं की निगरानी व समय पर चेतावनी हेतु नेपाल के तीन क्षेत्रीय सहयोग प्रस्ताव

काठमांडू, 28 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। नेपाल ने उपग्रह‑आधारित जलवायु जोखिम निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से क्षेत्रीय सहयोग के तीन प्रमुख प्रस्ताव पेश किए हैं। ये प्रस्ताव हिमालयी आपदाओं की निरन्तर निगरानी, उपग्रह‑डाटा का अधिकतम उपयोग और सभी देशों को अंतरिक्ष‑आधारित सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं।

इन प्रस्तावों को प्रस्तुत करने का अवसर संयुक्त राष्ट्र एशिया एवं प्रशांत आर्थिक तथा सामाजिक आयोग (UN ESCAP) द्वारा थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित पाँचवें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में मिला, जहाँ ऊर्जा मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ ने मंच संभाला। उन्होंने कहा, “केवल आपदाओं के खतरों का पता लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय पर चेतावनी जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों तक पहुंचना भी जरूरी है।”

श्रेठ ने बताया कि अगस्त और अक्टूबर में पूर्व चेतावनी के तहत भेजे गए टेक्स्ट संदेशों की मदद से नौ लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। दूरदराज के क्षेत्रों में उपग्रह चित्रों और ड्रोन के प्रयोग से जलप्रवाह का आकलन, बाढ़ के पूर्वानुमान में सुधार और जोखिम वाले क्षेत्रों में मोबाइल फ़ोन पर एक साथ आपातकालीन अलर्ट भेजने के लिए सेल‑ब्रॉडकास्टिंग प्रणाली को तैयार किया गया है।

वर्तमान में इंटरनेशनल इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवेलपमेंट सेंटर (आईसीआईएमओडी) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा पहचाने गए 47 उच्च‑जोखिम वाली हिमनद‑झीलों में से 21 नेपाल में स्थित हैं। श्रेठ ने उल्लेख किया कि छो रोल्पा, लोअर बरुण, लुमडिंग और होंगु जैसी प्रमुख झीलों के जलस्तर को कम करने के कार्य आरम्भ हो चुके हैं।

उन्होंने आगे कहा कि नेपाल हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र में रहने वाले लगभग दो अरब लोगों की सुरक्षा के लिए संयुक्त परियोजनाओं और क्षेत्रीय पहलों को आगे बढ़ाने को तैयार है और 2030 तक एशिया‑प्रशांत कार्ययोजना को लागू करने की इच्छा रखता है।

उल्लेखनीय है कि नेपाल और UN ESCAP ने उसी दिन एक कार्यशाला आयोजित करने का निर्णय लिया, जिसमें भोटेकोशी‑त्रिशूली आपदा से सीखे गए सबक पर चर्चा होगी, ताकि पूरे क्षेत्र में “एक आपदा से दूसरी आपदा” के जोखिम को रोका जा सके। श्रेठ एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एक अन्य संगोष्ठी में भी भाग लेंगे, जहाँ नेपाल की पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण आवश्यकताओं पर बात होगी, और फिर शनिवार को देश लौटेंगे।

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