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रिकॉर्ड खनन ब्लॉक नीलामी और पारदर्शी शासन व्यवस्था के साथ राजस्थान खनन क्षेत्र में सबसे आगे

जयपुर, 28 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। खनिज संपदा से समृद्ध राजस्थान अब केवल खनिज उत्पादन ही नहीं, बल्कि माइनिंग पोर्टल पर ई‑नीलामी तथा सुव्यवस्थित खनन ब्लॉकों के परिचालन के क्षेत्र में देश का नेतृत्व कर रहा है। पारदर्शी ई‑नीलामी, व्यवस्थित खनिज अन्वेषण और नए मिनरल ब्लॉकों को शीघ्र परिचालन में लाने की रणनीति ने प्रदेश को इस क्षेत्र में अग्रणी बना दिया है।

गत सितम्बर माह तक देश में कुल 739 मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी हुई, जिनमें से 141 ब्लॉकों की नीलामी राजस्थान में हुई—यह उपलब्धि स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यहाँ 102 ब्लॉकों की नीलामी वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ही हुई। मुख्यमंत्री एवं खान मंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में खान विभाग ने योजनाबद्ध कार्यप्रणाली, नियमित समीक्षा और प्रक्रियागत नवाचार अपनाए, जिससे राजस्थान को देश के लिए मॉडल प्रदेश के रूप में स्थापित किया गया।

राजस्थान न केवल माइनिंग सेक्टर में अग्रणी है, बल्कि नवाचारों में भी अपनी पहचान बना रहा है। अन्वेषण से लेकर ऑक्शन तक की पूरी रुपरेखा और ऑक्शन ब्लॉकों के परिचालन के लिये कार्ययोजना के साथ सहयोग व समन्वय ने राजस्थान को नया इतिहास लिखने में मदद की है।

निलाम किए गए 141 मेजर मिनरल ब्लॉकों में से 105 ब्लॉकों की माइनिंग लीज के लिये, 35 ब्लॉकों को कंपोजिट लाइसेंस के रूप में, और एक ब्लॉक को एक्सप्लोरेशन लाइसेंस के तहत नीलाम किया गया। 7 ब्लॉकों में सामरिक महत्व के क्रिटिकल मिनरल्स सरकार द्वारा नीलाम किये गए। 101 ब्लॉक लाइमस्टोन के, 13 आयरन ओर, 8 बेस मेटल, 4 सिलिसियस अर्थ, 3 मैग्नीज़, 2 गोल्ड, 2 पोटाश व हॅलाइट, 4 रेयर अर्थ एलिमेंट और एक-एक ब्लॉक गारनेट, फ्लोराइट, एमरल्ड और रॉकफास्फेट के लिये नीलाम किए गये।

वर्ष 2026‑27 के लिए 56 मेजर मिनरल ब्लॉकों का वार्षिक कैलेण्डर बनाकर नीलामी की जा रही है। 14 ब्लॉकों की नीलामी पूरी हो चुकी है, जबकि 24 ब्लॉकों की नीलामी भारत सरकार के यूनिफाइड माइनिंग पोर्टल पर जारी है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव माइनस अपर्णा अरोरा के अनुसार, नियमित समीक्षा के कारण राजस्थान ने सकारात्मक परिणाम देखे हैं। मध्यप्रदेश के बाद केवल राजस्थान ही है जहाँ मिनरल ब्लॉक तैयार करने से लेकर ई‑पोर्टल पर नीलामी तक की पूरी प्रक्रिया विभागीय अधिकारियों द्वारा ही पूरी की जाती है, जबकि अन्य प्रदेशों में यह कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से किसी संस्था से करवाया जाता है। यह पारदर्शिता, सरल क्रियान्वयन और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करता है।

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