
रांची, 26 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। झारखंड उच्च न्यायालय में सोमवार को जेलों में रिक्त पदों की नियुक्ति के संदर्भ में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गृह सचिव के खिलाफ अवमानना कार्रवाई को रोका और 7 दिसंबर तक मौजूदा आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि के भीतर जेलों में खाली पदों को भरने का आदेश पालन किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद शहाबुद्दीन ने कारण बताओ नोटिस का जवाब दाखिल किया। सरकार ने बताया कि गृह विभाग ने असिस्टेंट जेलर और जेल वार्डर के पदों के लिये शारीरिक दक्षता परीक्षा (फिजिकल टेस्ट) का कार्यक्रम तय कर दिया है। विभिन्न ज़ोन में अलग-अलग तिथियों पर परीक्षा आयोजित की जाएगी और भर्ती प्रक्रिया शीघ्र समाप्त कर ली जाएगी। हालांकि, अदालत ने इस जवाब पर असंतोष जताया।
दूसरी ओर, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने पक्ष रखा। याद दिलाते हुए अदालत ने बताया कि एक अप्रैल को झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार तथा संबंधित नियुक्ति आयोगों जेपीएससी और जेएसएससी को जेलों में रिक्त पदों की नियुक्ति प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी करने का आदेश दिया था। निर्धारित समयसीमा के भीतर अनुपालन न होने पर अदालत ने नाराजगी जताई थी।
पिछली सुनवाई में खंडपीठ ने आदेशों का समय पर पालन न करने और बार-बार समय बढ़ाने पर राज्य के गृह सचिव वंदना दादेल तथा जेएसएससी के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। अदालत ने दोनों अधिकारियों को अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की गई, इस पर कारण बताओ नोटिस जारी किया और एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के माध्यम से जवाब देने का निर्देश दिया।
साथ ही, न्यायालय ने जेल सुधार और मॉडल जेल मैनुअल के अनुपालन से जुड़े मामलों को भी स्वायत्त रूप से देखा है, और इस ही सत्र में जेलों में कर्मचारियों तथा अधिकारियों के रिक्त पदों की नियुक्ति का मुद्दा प्रमुखता से विचाराधीन है।
