
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। रस्क मीीडिया द्वारा निर्मित वेब सीरीज नाइन टू फ़ाइव यूट्यूब पर उपलब्ध है और इसे ★★★½ (3.5/5) की रेटिंग मिली है। कहानी प्रीत कमानी द्वारा निभाए गये अनुज के इर्द‑गिर्द घूमती है, जो किवी एप नामक स्टार्ट‑अप में नौकरी के लिए इंटरव्यू देता है। इंटरव्यू में वह थोड़ा घबराया हुआ दिखता है, पर मार्केटिंग एवं स्ट्रैटेजी हेड दीपक, भूमिका में राजेश कुमार, उसे नौकरी दे देते हैं। नई नौकरी के साथ ही अनुज को पता चलता है कि मकान‑मालिक ने फ्लैट खाली करने का नोटिस दे दिया है। ऑफिस में उसकी मुलाकात भाग्यश्री लिमये द्वारा निभाए गये यशस्विनी (उर्फ यश) से होती है, जो आत्मविश्वासी और काम में माहिर है।
अनुज को अक्सर “ऑलमोस्ट कुमार” कहा जाता है, क्योंकि वह हर बार लक्ष्य के बहुत करीब पहुँचकर भी पीछे रह जाता है। दीपक इस बात को “मेके द मोस्ट आउट ऑफ़ ऑलमोस्ट” कहकर समझाते हैं और अनुज को यह संदेश देते हैं कि ‘ऑलमोस्ट’ होना भी प्रगति का संकेत है। इस दौरान अनुज को दोस्ती, प्यार और पेशेवर दबाव से जुड़े नए अनुभव भी मिलते हैं, जिससे वह अपनी असफलताओं को लेकर निराश हो जाता है।
अभिनय की बात करें तो प्रीत कमानी की प्रस्तुति सीरीज का सबसे मजबूत पहलू माना गया है; उन्होंने अनुज के बेचैनी, असुरक्षा और महत्वाकांक्षा को सहजता से दिखाया है। राजेश कुमार दीपक के किरदार में हल्के‑फुल्के संवाद और हास्य लाते हैं, जो कहानी को संतुलित रखते हैं। भाग्यश्री लिमये यश के रूप में आत्मविश्वास और स्वाभाविकता लाती हैं, जबकि तान्या शर्मा व अन्य सहायक कलाकार कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।
लेखन का श्रेय सिद्धार्थ तिवारी और व्योम चराया को जाता है, जिन्होंने “ऑलमोस्ट कुमार” की अवधारणा को सरल लेकिन प्रभावशाली तरीके से पेश किया है। व्योम चराया ने निर्देशन में ऑफिस की चुनौतियों, हल्के‑फुल्के पलों और भावनात्मक क्षणों को इस तरह सजाया है कि दर्शक अपने ही रोज़मर्रा के संघर्षों से जुड़ाव महसूस करें। कुछ जगहों पर करियर, दोस्ती और प्रेम के पहलुओं में और कसाव की कमी रह गई, पर मूल विचार और संवाद दर्शकों की रुचि बनाए रखते हैं।
समग्र रूप से, नाइन टू फ़ाइव एक युवा की कहानी है जो लगातार “पहला स्थान” न मिल पाने से निराश नहीं होता, बल्कि गलतियों से सीख कर आगे बढ़ता है। प्रीत कमानी, राजेश कुमार और भाग्यश्री लिमये के योगदान इसे देखने लायक बनाते हैं, और यह संदेश देता है कि सफलता का अर्थ हमेशा शीर्ष पर पहुँचना नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास जारी रखना है।
