
काठमांडू, 26 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। नेपाल में आज से कार्तिक स्नान, दीपदान और विशेष तुलसी पूजा का क्रम आरंभ हुआ है। यह परम्परा हर वर्ष आश्विन शुक्ल पूर्णिमा से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तक चलती है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस समयावधि में पूजा‑पाठ, पवित्र स्नान, दीप प्रज्वलन और दान करने से आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। पूर्णिमा को दिव्य प्रकाश, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, इसलिए कार्तिक माह में धार्मिक अनुष्ठानों को विशेष महत्व दिया जाता है।
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि आश्विन शुक्ल पूर्णिमा से लेकर कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तक तुलसी की विशेष पूजा, कार्तिक स्नान और आकाशदीप जलाने से सौभाग्य, समृद्धि और मान‑सम्मान की प्राप्ति होती है। यह अनुष्ठान भगवान विष्णु को समर्पित है, और दीप प्रज्वलित करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, विशेषकर जब घरों में तुलसी पूजा की जाती है।
नेपाल पंचांग निर्णायक विकास समिति के अध्यक्ष तथा धर्मशास्त्र के विद्वान प्रो. डॉ. रामचंद्र गौतम ने बताया कि आश्विन शुक्ल पूर्णिमा से कार्तिक स्नान शुरू करने की परम्परा सदियों से चली आ रही है। उनका कहना है कि इस अवधि में स्नान करने से मन के बुरे विचारों को दूर करने में सहायता मिलती है।
इसी अवसर पर स्वयम्भू चैत्य में महादीप दान भी आयोजित किया जा रहा है। कार्तिक स्नान के कारण देश भर की सभी पवित्र नदियों में सुबह से ही लोगों की भीड़ देखी जा रही है। श्रद्धालु अपने परिवारों के साथ नदी किनारे पहुँच कर स्नान, दीपदान और दान की क्रियाएँ अंजाम दे रहे हैं, जिससे इस पवित्र अवधि की आध्यात्मिक महत्ता और सामाजिक एकजुटता दोनों स्पष्ट हो रही हैं।
