
शाजापुर, 25 अक्टूबर (हिंस) – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों के समक्ष कहा कि वह कभी हिंदुत्व के समर्थक नहीं रहे और न बनेंगे, क्योंकि हिंदुत्व का सनातन धर्म से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म हजारों साल पुराना है, जबकि “हिंदुत्व” शब्द का प्रयोग प्रथम बार विनायक दामोदर सावरकर ने किया था।
दिग्विजय सिंह रविवार को शाजापुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में यह बात कहते हुए, “सनातन धर्म में नफरत और कटुता के लिए कोई स्थान नहीं है” के साथ इस मत को दोहराए। वह उज्जैन से आयोध्या तक चल रही सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के साथ शाजापुर पहुँचे थे।
वार्ता के दौरान उन्होंने संविधान की रक्षा और नागरिकता के अधिकारों पर भी प्रश्न उठाए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि संविधान हर नागरिक को मतदान का अधिकार देता है और मतदाता सूची में नाम जोड़ना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, न कि यह तय करना कि कौन भारत का नागरिक है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “नोट चोरी और वोट चोरी दोनों मामलों में ज्ञानेश कुमार की भूमिका है” और मतदाता सूची व मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए।
शाजापुर स्थित माँ राजराजेश्वरी मंदिर में पूजा‑अर्चना के बाद दिग्विजय सिंह ने अपनी यात्रा का औपचारिक प्रारम्भ किया। मंदिर परिसर में ध्वजारोहण, वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगान के साथ यात्रा के शुभारम्भ की औपचारिकताएँ पूरी हुईं। इस अवसर पर पूर्व मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा भी उपस्थित थे।
यात्रा के अगले पड़ाव के रूप में अभयपुर निर्धारित किया गया है, उसके बाद पनवाड़ी और फिर राजगढ़ जिले के सारंगपुर में प्रवेश होगा। दिग्विजय सिंह हाथ में संविधान लेकर दृढ़ता से “जय श्रीराम” व “बम भोले” के नारे लगा रहे थे। इस यात्रा के उद्देश्य और उससे जुड़े कार्यक्रमों को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक चर्चा तेज़ है।
