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सतनामी समाज में चुनाव समिति के विरुद्ध बैठक, चुनाव प्रक्रिया से बहिष्कार का निर्णय

धमतरी, 25 अक्टूबर (हि.स.)। सतनामी समाज के जिला धमतरी में चुनाव प्रक्रिया पर विवाद बढ़ता जा रहा है। रविवार को गुरु बालक दास भवन में समाज के जिलाध्यक्ष कपिल देशलहरे एवं अखिल भारतीय सतनामी समाज के पंजीकृत जिलाध्यक्ष भागीरथी भास्कर की संयुक्त पहल पर सामाजिक चुनाव प्रक्रिया पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई गई।

बैठक में मगरलोड, भखारा, कुरूद, नगरी, धमतरी ग्रामीण और धमतरी शहर के ब्लॉक अध्यक्ष, साथ ही शासकीय सतनामी सेवक संघ, महिला समिति और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए।

सभी उपस्थित सदस्यों ने वर्तमान में गठित चुनाव समिति के गठन और चुनावी प्रक्रिया पर आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि किसी समिति को समाज का नाम देकर चुनाव कराना असंगत है, क्योंकि समाज में पहले से ही विभिन्न समितियाँ कार्यरत हैं। उन्होंने समिति के नियमों को गलत बताया और चुनाव प्रक्रिया तथा प्रस्तावित निर्वाचन का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। शासकीय सतनामी सेवक संघ ने भी चुनाव को नकार दिया, समाज के आधार स्तम्भ को देखते हुए इस रुख को महत्वपूर्ण माना। इसी तरह सतनामी समाज के ब्लॉक भखारा और धमतरी ग्रामीण ने भी चुनाव समिति और चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार किया।

कुरूद ब्लॉक के प्रतिनिधियों ने समिति के गठन के बारे में जानकारी न मिलने पर सवाल उठाया, यह कहते हुए कि चुनाव प्रक्रिया, नीति और नियम समाज की परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं और परिवारवाद के आधार पर मतदाता बनाकर समाज को चुनाव के नाम पर गुमराह किया जा रहा है।

बैठक में जिलाध्यक्ष कपिल देशलहरे के अगस्त 2028 तक के कार्यकाल और सामाजिक कार्यों पर भी चर्चा हुई। उपस्थित सदस्यों ने बताया कि उनका कार्यकाल प्रदेशस्तरीय सम्मेलन, सम्मान समारोह, नशामुक्ति अभियान, रोजगार के अवसर, धर्मांतरण से जुड़े विषय, जयंती और समारोह, शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, सभ्यता-संस्कृति, रीति-रिवाज, पंथी नृत्य, जैतखाम तथा अन्य समाजों के साथ भाईचारे पर केंद्रित है।

समिति ने निर्णय लिया कि जिलाध्यक्ष के मार्गदर्शन में समाज के सदस्यों की सहमति और सहयोग से चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। समाज के वरिष्ठ पत्रकारों, सामाजिक चिंतकों, शासकीय सेवकों और युवाओं की पहल पर लगातार बैठकें आयोजित करके आपसी सामंजस्य स्थापित करने पर जोर दिया गया, ताकि सामाजिक एकता बनी रहे और सभी पक्षों की सहमति से निर्वाचन प्रक्रिया तय की जा सके।

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