Tuesday, July 14खबर जो असर करे |
Shadow

मध्य प्रदेश में तकनीक आधारित उद्योग विकास : संदर्भ- ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0’

डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भारत में पिछले एक दशक हुए डिजिटल परिवर्तनों ने  राष्ट्रीय विकास के आगे उसे आज अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर विकास की धुरी बनाया है। डिजिटल इंडिया मिशन, इंडिया एआई मिशन, सेमीकंडक्टर मिशन, मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों ने देश को नई तकनीकी दिशा दी है। इसी राष्ट्रीय दृष्टि को राज्य स्तर पर गति देने का प्रयास इन दिनों मध्यप्रदेश में होता हुआ देखा जा सकता है, जिसमें कि ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0’ उसी परिवर्तन का सशक्त प्रतीक बनकर हमारे सामने है।

यह सम्मेलन निश्‍चि‍त ही मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस नई आर्थिक सोच का परिचायक है, जिसमें मध्यप्रदेश स्वयं को कृषि प्रधान राज्य की पारंपरिक छवि से आगे बढ़ाकर भारत के उभरते हुए हाई-टेक औद्योगिक और डिजिटल केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहता है।

वस्‍तुत: जैसा कि मुख्‍यमंत्री कई अवसरों पर कहते भी रहे हैं कि विश्व बैंक और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अध्ययनों में लगातार यह बात सामने आई है कि भविष्य की आर्थिक प्रतिस्पर्धा डिजिटल प्रौद्योगिकी, ज्ञान आधारित उद्योगों और नवाचार क्षमता पर आधारित होगी। उत्पादन से अधिक मूल्य अब डिजाइन, डेटा, अनुसंधान और डिजिटल सेवाओं से उत्पन्न हो रहा है।मध्यप्रदेश ने इसी परिवर्तन को समय रहते समझा है। लंबे समय तक कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और पारंपरिक विनिर्माण पर आधारित अर्थव्यवस्था अब तकनीकी निवेश की ओर बढ़ रही है।

आज एक बार फिर राज्‍य की राजधानी भोपाल में आयोजित कॉन्क्लेव में 178.70 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित 20 औद्योगिक इकाइयों का लोकार्पण मुख्‍यमंत्री द्वारा किया गया है। इन इकाइयों से 1,229 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इसी अवसर पर गूगल प्ले (इंडिया लीड), मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन जैसी कई दिग्‍गज कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी हुआ। साथ ही स्पेन की Submer India Private Limited सहित विभिन्न कंपनियों को लेटर ऑफ अलॉटमेंट प्रदान किए गए, जो यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश वैश्विक तकनीकी कंपनियों के निवेश मानचित्र पर अपनी जगह बना रहा है।

इस कॉन्क्लेव के माध्‍यम से मोहन सरकार ने 40 हजार करोड़ रुपये के संभावित निवेश के साथ 35 हजार रोजगार का लक्ष्य रखा है। यदि यह निवेश प्रस्ताव समयबद्ध ढंग से परियोजनाओं में बदलते हैं, तो प्रदेश की औद्योगिक संरचना में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा।ऐसे निवेशों का प्रभाव दूरगामी होता है। इनके साथ सहायक उद्योग, लॉजिस्टिक्स, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा क्षेत्र और स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तेजी से विकसित होते हैं। यही कारण है कि तकनीकी निवेश को आधुनिक अर्थव्यवस्था का “मल्टीप्लायर सेक्टर” माना जाता है।

यहां ध्‍यान देने योग्‍य यह भी है कि इससे पूर्व प्रदेश में सम्‍पन्‍न हुए एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव के पहले दो आयोजनों ने निवेश की रफ्तार को नई गति दी है। कॉन्क्लेव 1.0 में राज्य को 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले थे, जिससे करीब 75 हजार रोजगार के अवसर बने। दूसरे एडिशन (कॉन्क्लेव 2.0) में 12 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आया, जिससे 48 हजार युवाओं को रोजगार मिला। अब यह अपने में सफलता के साथ इस दिशा में तीसरा कॉन्क्लेव सम्‍पन्‍न हुआ है।

यहां यह भी बताया गया है कि प्रदेश में 1 गीगावाट क्षमता वाले एआई डेटा सेंटर की परियोजना साकार होगी। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं, डिजिटल बैंकिंग, ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा और ई-कॉमर्स का पूरा ढांचा डेटा सेंटरों पर निर्भर है। भारत में डिजिटल सेवाओं की तेजी से बढ़ती मांग को देखते हुए डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल माना जा रहा है। यदि मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में समय रहते मजबूत आधार तैयार करता है, तो वह राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

इसी तरह से आज मोबाइल फोन से लेकर रक्षा उपकरण, मेडिकल डिवाइस, इलेक्ट्रिक वाहन और अंतरिक्ष तकनीक तक हर क्षेत्र की आधारशिला सेमीकंडक्टर हैं। इसी प्रकार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर वे संस्थान हैं, जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियां अनुसंधान, इंजीनियरिंग, डिज़ाइन, सॉफ्टवेयर विकास और वैश्विक परिचालन संचालित करती हैं।

यदि मध्यप्रदेश इन दोनों क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराता है, तो प्रदेश में रोजगार के साथ उच्च कौशल वाले पेशेवरों का नया वर्ग भी तैयार होगा। इससे राज्य की आय, नवाचार क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी वृद्धि होगी। वहीं, इंदौर सुपर कॉरिडोर, भोपाल आईटी पार्क के विस्तार तथा कोलार रोड पर प्रस्तावित नए आईटी पार्क इस बात का संकेत हैं कि सरकार निवेश को लेकर गंभीर है, इसलिए उसके लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा भी तैयार कर रही है।

ऐसे में कहना यह भी है कि मध्यप्रदेश की यह पहलें उस समय सामने आई हैं, जब केंद्र सरकार डिजिटल इंडिया, इंडिया एआई मिशन, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, मेक इन इंडिया, पीएलआई (Production Linked Incentive) योजनाओं तथा स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से तकनीकी विनिर्माण और डिजिटल नवाचार को प्रोत्साहित कर रही है। यदि राज्य सरकार इन राष्ट्रीय पहलों के साथ अपने औद्योगिक विकास मॉडल का प्रभावी समन्वय करने में सफल रहती है, तो यह तय है कि राज्‍य को अतिरिक्त निवेश, तकनीकी सहयोग और वैश्विक कंपनियों की भागीदारी का व्यापक लाभ मिलेगा।

कुल मिलाकर कहें तो एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 यह संकेत देता है कि मध्यप्रदेश अब भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर अपनी विकास रणनीति तैयार कर रहा है। कृषि, विनिर्माण और तकनीक इन तीनों क्षेत्रों का संतुलित विकास प्रदेश को नई आर्थिक शक्ति प्रदान कर सकता है।यदि राज्य इन सभी मोर्चों पर समान गति से आगे बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश न सिर्फ भारत के लिए बल्‍कि भारतीय उपमहाद्वीप के साथ युरोप के प्रमुख हाई-टेक निवेश और नवाचार केंद्रों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर पाने में सफल होगा। हम उम्‍मीद करें कि मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस दिशा में जो लगातार प्रयास कर रहे हैं, उनके ये सभी प्रयास पूर्णता को प्राप्‍त करें। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *