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मिस्र में खुदाई के दौरान मिली 3000 साल पुराने ‘T’ शेप की रहस्यमयी कब्र, देवी-देवताओं के चित्र भी मिले

नई दिल्‍ली। मिस्र हमेशा से ही अपने पिरामिडों, ममी और रहस्यों के लिए दुनिया भर में मशहूर रहा है. दक्षिण मिस्र के लक्सर शहर में पुरातत्वविदों को एक या दो साल नहीं, बल्कि करीब 3,000 साल पुराना मकबरा मिला है. यह खोज उस समय की है जिसे इतिहास में ‘रामेसाइड काल’ कहा जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से न सिर्फ मिस्र के इतिहास को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे देश के पर्यटन को भी एक नया बूस्ट मिलेगा.

मिस्र के लक्सर शहर में वैज्ञानिकों को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. अधिकारियों ने बताया कि यहां एक प्राचीन मकबरा मिला है जो करीब 3,000 साल पुराना है. यह खोज लक्सर शहर के वेस्ट बैंक पर स्थित ‘शेख अब्द अल-कुरना’ कब्रिस्तान में की गई है. इस खोज को लीडन यूनिवर्सिटी के एक डच पुरातत्व मिशन ने अंजाम दिया है. मिस्र के पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय ने भी इस खोज की पुष्टि की है और इसे इतिहास के नजरिए से बेहद खास बताया है.

पासेर नाम के शख्स का है मकबरा
शुरुआती जांच और रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि यह मकबरा ‘पासेर’ नाम के एक व्यक्ति का है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मकबरा रामेसाइड काल का है. यह वह दौर था जब मिस्र पर 19वें और 20वें राजवंश का शासन हुआ करता था. मकबरे की दीवारों पर बनी कलाकृतियों और नक्काशी की अनूठी शैली को देखकर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं. यह जगह पहले से खोजी गई एक अन्य कब्र के पूर्व में स्थित है.

अनोखी बनावट और उल्टा ‘T’ आकार
इस मकबरे की बनावट न्यू किंगडम (1570-1069 ईसा पूर्व) के समय के पारंपरिक थिबन मकबरों जैसी ही है. यह देखने में काफी अलग और दिलचस्प है. इसमें एक खुला आंगन है जो अंदर की तरफ एक चट्टान को काटकर बनाई गई चैपल की ओर जाता है. इस चैपल का आकार अंग्रेजी के उल्टे ‘T’ जैसा है. इसके साथ ही जमीन के नीचे दफनाने के लिए विशेष कक्ष यानी दफन कक्ष बनाए गए हैं, जो सदियों बाद भी सुरक्षित हैं.

दीवारों पर दिखे देवी-देवता
पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान आंगन में कई ऐसी चीजें मिली हैं जो इतिहास को बयां करती हैं. यहां मिट्टी की ईंटों से बना एक बेंच मिला है, जिसका इस्तेमाल अंतिम संस्कार के समय किया जाता था. इसके अलावा प्रवेश द्वार तक जाने वाली सीढ़ियां भी मिली हैं. मकबरे के अंदर पासेर के नाम के कई शिलालेख मिले हैं. इन चित्रों में पासेर को अलग-अलग मंदिरों के अंदर देवी-देवताओं की पूजा करते हुए दिखाया गया है. एक जगह वह अपनी पत्नी के साथ प्रसाद की मेज के सामने बैठे भी नजर आ रहे हैं.

वैज्ञानिकों की टीम का कहना है कि अभी इस मकबरे पर और रिसर्च की जाएगी. वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस मकबरे में असल में किसे दफनाया गया था और उस दौर की सामाजिक स्थिति कैसी थी. मिस्र सरकार को उम्मीद है कि इस नई खोज से देश में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी.

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