नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली (Delhi) के प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त निर्देश देते हुए चिंता भी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वाहनों के अलावा पराली जलाने की घटनाएं भी प्रदूषण की मुख्य वजहों में से हैं। पंजाब और हरियाणा (Punjab and Haryana) में सख्ती के बाद भी पराली जलाने पर लगाम नहीं लग रही है। वहीं सैटेलाइट मॉनिटरिंग (Satellite Monitoring) से बचने के लिए किसानों ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम वाला तरीका निकाल लिया है। दरअसल पोखरण में परमाणु परीक्षण के दौरान डॉ. कलाम ने अमेरिकी सैटलाइट को धोखा देने के लिए ऐसा समय चुना था जब वह कोई जानकारी हासिल ना कर पाए।
कैसे सैटेलाइट को मात देते देते हैं किसान?
एक रिपोर्ट के मुताबिक अब किसान भी ऐसे समय पर पराली जलाते हैं जब कोई ऑब्जरवेटरी सैटलाइट वहां से नहीं गुजरता है और ना ही तस्वरें लेता है। किसानों को पता है कि सैटलाइट तभी देख सकते हैं जब वे वहां से गुजरते हैं। इसीलिए वे चालाकी करते हैं और पराली शाम को या फिर रात में जलाते हैं। इससे बहुत सारी पराली जलाने की घटनाओं के बारे में पता ही नहीं चलता है।
मौजूदा सिस्टम अपर्याप्त
इंटरनेशनल फोरम फॉर इन्वायरमेंट सस्टेनेबिलिटी ऐंड टेक्नॉलजी (iFOREST) ने एक मल्टीसैटेलाइट मॉनिटरिंग प्लैटफऑर्म तैयार कया है। इसके जरिए सैटलाइट से ही पराली जलाने की घटनाएं गिनी जा सकती हैं। iFOREST के सीईओ डॉ. चंद्र भूषण के मुताबिक मौजूदा प्लैटफॉर्म पूरी तस्वीर साफ करने में सक्षम नही है. यह पोलर ऑर्बिटिंग सैटलाइट के जरिए पराली की घटनाओं की गिनती करता है।
उन्होंने कहा, मौजूदा सिस्टम के जरिए हम केवल इतना पता लगा पाते हैं कि कितनी जगहों पर आग लगाई गई। लेकिन यह नहीं पता चल पाता है कि कहां और किस समय पराली जलाई गई। इसके अलावा कितने बड़े इलाके में आग लगाई गई थी। अगर ये सारी जानकारियां हासिल हों तभी नीति निर्माताओं को भी मदद मिल सकती है।
2025 में तेजी से कम हुईं पराली जलाने की घटनाएं?
रिपोर्ट के मुतबिक 2021 में जहां पराली जलाने की 80 हजार घटनाएं सामने आई थीं वहीं 2025 में 6 हजार घटनाओं को ही पकड़ा जा सका। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सख्ती, जुर्माने और नई मशीनरी की वजह से लोगों ने पराली जलाना कम किया है। लेकिन जानकारों का कहना है कि इसके पीछे एक कारण किसानों का सैटलाइट मॉनिटरिंग को चकमा देना भी है।
इस समय NASA के मॉडरेट रेजोल्यूशन इमेडिंग स्पेट्रोडायोमीटर के जरिए परलाी जलाने की घटनआों का पता लगाया जाता है। इसके लिए विजिबल इन्फ्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर का इस्तेमाल होता है। इस तरह के चार सिस्टम हैं जो कि आग लगने को लेकर अलर्ट भेजते हैं। हालांकि ये चारों ही सिस्टम एक जगह पर एक निश्चित समय की ही जानकारी देते हैं। आम तौर पर ये सैटलाइट दोपहर में यहां से गुजरते हैं। वहीं इस सिस्टम के जरिए जहां आग लगती है उसकी जानकारी मिलती है। यह नहीं पता चलता कि कितने इलाके में इसका प्रभाव पड़ा है।
