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छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भक्ति व लोकसंगीत की रौनक

रायपुर, 03 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के दूसरे दिन, सप्ताह के सोमवारी की देर शाम को नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव मैदान में कला, संस्कृति, आस्था और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्य मंच पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत से परिचित कराया। वहीं छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत, शास्त्रीय नृत्य और आधुनिक संगीत की प्रस्तुतियों ने राज्योत्सव की शाम को यादगार बना दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, राज्यपाल श्री रमेन डेका ने दूसरे दिन प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को सम्मानित कर बधाई दी।

मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत विशेष नाट्य प्रस्तुति मैं अयोध्या हूं से हुई। एक घंटे की इस नाट्य प्रस्तुति में अयोध्या की ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रभावशाली अभिनय एवं कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। नाट्य मंचन में भारतीय संस्कृति, आस्था, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास की झलक देखने को मिली। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से भारतीय सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवंत किया और राम मंदिर निर्माण के इतिहास, आस्था और संस्कृति के इस अनूठे संगम ने दर्शकों को देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया।

स्वास्ति मेहुल की सुरीली आवाज से सजी सांस्कृतिक संध्या में, प्रसिद्ध पार्श्व गायिका स्वास्ति मेहुल ने अपनी भक्ति प्रस्तुति से शाम को भक्ति के रस में डुबो दिया। उन्होंने “राम आएंगे…” और “कान्हा आन बसो वृंदावन…” जैसे भक्ति गीतों के माध्यम से लोगों को भक्ति मय माहौल से रूबरू कराया।

छत्तीसगढ़ी पार्श्व गायिका कंचन जोशी ने छत्तीसगढ़ी गानों से दर्शकों का मन मोह लिया। “मोला ले दे ना राजा सोन के नथनी…”, “मोर मन झूमे…”, और “कर ले तै मया के चिन्हारी…” जैसे गीतों के साथ श्रोता अपनी जगह पर ही झूमने लगे।

शिल्पग्राम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक छटा बिखरी। यहाँ 11 प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत, पंडवानी, सुआ नृत्य, ओडिसी, कथक, सूफी संगीत, गजल और लोकमंच जैसी विविध कलाएँ प्रस्तुत की गईं। प्रसन्ना अवस्थी ने लोकसंगीत एवं नृत्य, सुष्मिता दास ने ओडिसी नृत्य, समप्रिया पूजा निषाद ने पंडवानी गायन, श्री अंकित निर्मलकर ने सूफी, गजल एवं सुगम गायन, और गायक बैंड आदित्य मिश्रा ने संगीत प्रस्तुत किया।

शिल्पग्राम में प्रदर्शित पंडवानी और सुआ नृत्य में छत्तीसगढ़ की लोकआस्था और परंपराओं की झलक स्पष्ट हुई, जबकि ओडिसी और कथक नृत्य ने भारतीय शास्त्रीय कला की समृद्ध विरासत को उजागर किया। सूफी संगीत, गजल और सुगम गायन ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में संगीत के विविध रंग भरे।

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