
बलरामपुर, 03 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर सोमवार को हाई स्कूल मैदान में जिला स्तरीय राज्योत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का थीम सशक्त नारी, युवा उड़ान था, और इसमें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, जिले की उपलब्धियों और विकास कार्यों को विभागीय स्टॉलों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को रंगीन लोककला और परंपराओं के संगम के रूप में सुसज्जित किया।
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में सरगुजा सांसद चिन्तामणि महाराज ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ी में जय जोहार के साथ लोगों का अभिवादन किया और कहा, “राज्य अपनी स्थापना के 26 वर्ष पूरे कर चुका है और इस वर्ष का आयोजन ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ की थीम पर आधारित है।” उन्होंने बेटियों के विद्यालय के मैदान को इस थीम का प्रतीक बताया, जहाँ से शिक्षा प्राप्त कर निकलने वाली बेटियाँ भविष्य में प्रदेश की दिशा तय करेंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और महतारी वंदन योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं से महिलाओं के जीवन में बदलाव आया है। “धरती आबा अभियान और पीएम-जनमन के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, आवास, पानी और बिजली जैसी सुविधाएँ पहुंचाई जा रही हैं,” उन्होंने आगे कहा।

कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने स्वागत उद्बोधन में जिले के विकास में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जिले में 10 हजार से अधिक स्व-सहायता समूह से करीब 1 लाख 15 हजार परिवार जुड़े हैं। समूहों की महिलाएं छोटी बचत से आगे बढ़कर लखपति दीदी बनने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रिज्मा एआई के साथ हुए समझौते के बाद बलरामपुर प्रदेश का पहला जिला बन गया है, जहां एआई डेटा एनोटेशन सेंटर स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से जिले की महिलाएं और युवा अपने क्षेत्र में रहकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े काम सीख सकेंगे।
कार्यक्रम में मिशन आचार्य के जरिए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के प्रयासों और बालभोग योजना की जानकारी भी दी गई। “आकांक्षी विकासखंड शंकरगढ़ के 967 बच्चों को प्रतिदिन रागी और मिलेट्स से बना पौष्टिक लड्डू दिया जा रहा है,” उन्होंने उल्लेख किया। इसके अलावा चांगरो के जैविक जीराफूल चावल की ब्रांडिंग और जल संरक्षण के लिए किसानों द्वारा स्वेच्छा से अपनी भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा देने वाले मॉडल का भी उल्लेख किया।
सांस्कृतिक संध्या में विद्यालयों और छात्रावासों के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ी स्वागत नृत्य, सुवा नृत्य, छत्तीसगढ़ी रिमिक्स, शिव तांडव, कान्हा और सूफी नृत्य सहित प्रस्तुतियाँ दीं। साथ ही घूमर, हरियाणवी, अरुणाचली और नेपाली लोकनृत्य ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। बड़ौड़ी के पहाड़ी कोरवा कलाकारों ने उड़िया लोकनृत्य और नारी सशक्तिकरण पर आधारित प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। बिलासपुर की वाइब्रेशन डांस एकेडमी ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्य प्रस्तुत किए, जबकि बनारस के अक्षत कलेक्टिव ने उप-शास्त्रीय और सुगम गायन से सांस्कृतिक संध्या को सुरमय बनाया।
