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धार्मिक ग्रंथों के मूल्यों के अनुरूप जीवन‑यापन पर डीवाई चंद्रचूड़ का संदेश

नई दिल्ली, 03 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित जीवन मूल्यों के अनुरूप आचरण करने वाले व्यक्ति संतोष और प्रसन्नता का अनुभव करते हैं, यह विचार डीवाई चंद्रचूड़ ने इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा मनाए गए माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी महोत्सव के समापन समारोह में रखा।

तीन दिवसीय महोत्सव का समापन ज्ञान यज्ञ की मशाल रैली और विश्व कल्याण के महासंकल्प के साथ हुआ। समारोह में विचार क्रांति, मानवीय एकता, सामाजिक सद्भाव और नवयुग निर्माण का संदेश दिया गया। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि इस जन्मशताब्दी महोत्सव का समापन युग निर्माण की यात्रा का अंत नहीं बल्कि गुरु‑देव‑माता जी के संकल्पों को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने का अवसर है।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने संत ज्ञानेश्वर रचित ‘पसायदान’ के छंदों का हवाला देते हुए मानवीय मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने दुष्प्रवृत्तियों के अंत, सत्कर्मों के प्रति अनुराग और सभी प्राणियों के बीच मैत्रीभाव विकसित करने के संदेश की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में वर्णित मूल्यों के अनुसार जीवन व्यतीत करने से मनुष्य के जीवन में संतोष और प्रसन्नता उत्पन्न होती है, तथा सदाचार, परस्पर प्रेम और मानवीय संवेदनाएँ को वास्तविक रूप में अपनाना आवश्यक है।

केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि माता भगवती देवी शर्मा का संपूर्ण जीवन सेवा, समर्पण, सादगी और समन्वय की अनुपम मिसाल है। उन्होंने गायत्री परिवार को मानवीय मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक कल्याण के आदर्शों से जोड़ते हुए बताया कि गुरु‑देव‑माता जी की तप, त्याग और लोकमंगल की संकल्पनाएँ इस परिवार को व्यापक सामाजिक चेतना प्रदान करती हैं।

विदाई सत्र में ‘ज्योति कभी नहीं बुझेगी’ विषय पर डॉ. चिन्मय पण्ड्या, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष, ने वर्ष 2026 को गायत्री परिवार के लिये ‘सौभाग्य का प्रयाग’ कहा और कहा कि यह वर्ष आध्यात्मिक साधना और इतिहासिक उपलब्धियों का पावन अवसर है।

समापन अवसर पर निकाली गई ज्ञान यज्ञ की मशाल रैली ने विश्व शांति, मानवीय एकता, सामाजिक सद्भाव और सकारात्मक चिंतन का संदेश दिया, तथा गुरु‑देव‑माता जी के विचारों को जन‑जन तक पहुँचाने के लिए जनांदोलन का स्वरूप बनाने का आह्वान किया। इस प्रकार तीन दिवसीय महोत्सव ने यह स्पष्ट किया कि गुरु‑देव‑माता जी के युग निर्माण संकल्पों की यात्रा निरन्तर जारी रहेगी।

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