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पलामू की नदियों को नया जीवन: स्वच्छता अभियान और रिपोर्ट तैयार

पलामू, 29 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। पलामू जिले से होकर बहने वाली प्रमुख नदियाँ—उत्तरी कोयल, सोन, अमानत, बटाने, ओरंगा और भेलवा—को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने कदम तेज कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत, प्रशासन नदियों की वर्तमान स्थिति का विस्तृत सर्वे कर रिपोर्ट तैयार कर रहा है, जिसे राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

गांधी जयंती के अवसर पर, प्रशासन ने नदी स्वच्छता अभियान शुरू किया। मेदिनीनगर में कोयल और अमानत नदी के संगम स्थल पर सफाई और पौधारोपण कार्य किया गया। साथ ही नदियों में गिरने वाले गंदे पानी, कचरे और सीवेज की स्थिति का आकलन भी चल रहा है।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2024 के अनुपालन की समीक्षा के दौरान, नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की तैयारी हो रही है, ताकि नालियों और शहरों का गंदा पानी सीधे नदियों में न पहुँचे। अभियान और सर्वे से जुड़े अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पलामू के उपायुक्त, दिलीप प्रताप सिंह शेखावत, ने गुरुवार को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में भोपाल म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से संबंधित मामले के तहत पलामू की नदियों की स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई है। वे ने कहा कि नदियों को स्वच्छ रखने के लिए ठोस योजना पर काम किया जा रहा है और कचरा प्रबंधन नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। नदियों को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की योजना भी बनाई जा रही है।

कचरा और सीवेज बनी नदियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पलामू की लगभग 15 से 20 लाख आबादी सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इन नदियों पर निर्भर है। फिर भी, मेदिनीनगर और रेहला में कोयल नदी के किनारे कचरा डंप करने की शिकायतें हैं, और हुसैनाबाद में कचरा व सीवेज सोन नदी में पहुँच रहा है। भेलवा नदी में भी बिश्रामपुर से कचरा और नाली का पानी जाने की रिपोर्टें सामने आई हैं। नदी किनारे अतिक्रमण भी प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण है।

नदियों का पलामू से गहरा जुड़ाव है: उत्तरी कोयल नदी गुमला के कूटवा गांव से निकलती है, लगभग 260 किलोमीटर की दूरी तय करती है, जिसमें से 100 किलोमीटर पलामू से होकर गुजरता है। सोन नदी हैदरनगर और हुसैनाबाद के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है, जबकि अमानत नदी 210 किलोमीटर लंबी है और पूर्व से पश्चिम की ओर कोयल नदी में मिलती है।

पर्यावरणविद् कौशल किशोर जायसवाल ने कहा कि प्रशासन की पहल का स्वागत है, परंतु नदी बचाने के लिए आम लोगों की भागीदारी अनिवार्य है। मेदिनीनगर के निवासी गुड्डू खान ने नदी किनारे कचरा डंप और अतिक्रमण पर चिंता जताते हुए इसे गंभीर खतरा बताया।

प्रशासन की पहल, सीवेज ट्रीटमेंट की तैयारी और कचरा प्रबंधन को लेकर प्रस्तावित कार्रवाई से पलामू की नदियों के पुनर्जीवन की उम्मीद जगी है। अब देखना होगा कि तैयार होने वाली रिपोर्ट के बाद योजनाएँ जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती हैं।

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