
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। राऊज एवेन्यू कोर्ट के सेशंस कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को चार महिला पहलवानों की याचिका पर जवाब दाखिल करने का अंतिम समय‑सीमा दे दिया है। यह याचिका यौन शोषण के मामले में बरी करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देती है। विशेष जज दिग्विनय सिंह ने उन्हें एक हफ़्ते के भीतर उत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जबकि अगली सुनवाई 20 नवंबर को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व सचिव विनोद तोमर के वकीलों ने उत्तर देने के लिए एक हफ़्ते की माँग की। कोर्ट ने इस माँग को स्वीकार कर जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर प्रदान किया। इस याचिका के संबंध में 28 सितंबर को बृजभूषण शरण सिंह व विनोद तोमर को नोटिस जारी किया गया था।
चार महिला पहलवानों ने राऊज एवेन्यू कोर्ट के मजिस्ट्रेट कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश को सेशंस कोर्ट में चुनौती दी है। उनका दावा है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चयनित साक्ष्यों के आधार पर गलत फैसला सुनाया और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी की। उस आदेश में यह कहा गया था कि महिला पहलवानों ने लम्बे समय तक चुप्पी बनाए रखी और आरोपियों के साथ सामान्य संबंध जारी रखा, जिसके कारण ब्रीजभूषण शरण सिंह व विनोद तोमर को बरी किया गया।
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354डी, 354ए तथा 506 (1) के तहत आरोप लगाए गए थे। सुनवाई में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि 7 सितंबर 2022 को हुई घटना के दिन वे भारत में नहीं थे। उनके वकील राजीव मोहन ने कहा कि ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट दिल्ली पुलिस कमिश्नर को केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई थी।
राजीव मोहन ने यह भी उल्लेख किया कि महिला पहलवानों का पहला विरोध प्रदर्शन 18 जनवरी 2023 को जंतर-मंतर पर हुआ था, और 19 जनवरी 2023 को एक पहलवान ने सरकार से मुलाकात कर अपना मामला प्रस्तुत करने की इच्छा जताई थी। महिला पहलवानों के वकील रेबेका जॉन ने कहा कि ओवरसाइट कमेटी नियमों के अनुसार स्थापित नहीं हुई थी और उसी चार्जशीट में लगाए गए आरोपों के आधार पर आरोपी के खिलाफ निर्णय लेना चाहिए।
