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खेल और शिक्षा मंत्रालय ने यूनेस्को से ऐतिहासिक समझौता, 13 भाषाओं में टूलकिट तैयार

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। देश के स्कूलों में खेल के मूल्यों और डोपिंग-रहित खेल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी और यूनेस्को ने बुधवार को एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये। इस पहल का उद्देश्य ‘हर कक्षा में खेल मूल्य टूलकिट’ के माध्यम से बच्चों में सम्मान, ईमानदारी और निष्पक्षता जैसे मूल्यों को शिक्षा, खेल और कक्षा की दैनिक गतिविधियों का हिस्सा बनाना है। टूलकिट के वीडियो मॉड्यूल 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि देशभर के विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई जा सके और एक मजबूत तथा निष्पक्ष खेल व्यवस्था विकसित हो सके।

यह समझौता राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) इंडिया के स्वच्छ खेल सम्मेलन में हुआ। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस अवसर पर खेल और शिक्षा को एकीकृत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह पहल खेलो भारत नीति 2025 में भी रेखांकित खेल और शिक्षा के बीच समन्वय की सोच के अनुरूप है।

सम्मेलन में दक्षिण एशिया के लिए यूनेस्को के क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक डॉ. टिम कर्टिस, शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव टी.के. अनिल कुमार, खेल सचिव हरि रंजन राव और नाडा के महानिदेशक अनंत कुमार भी उपस्थित रहे। मंगलवार को यूनेस्को के डोपिंग रोधी सम्मेलनों की वैधानिक बैठकों में शामिल अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन में भाग लिया। भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी सचिन यादव भी इसमें शामिल हुए।

खेल में उत्कृष्टता के साथ ईमानदारी भी जरूरी : मांडविया

“खेल में उत्कृष्टता और खेल की ईमानदारी साथ-साथ चलनी चाहिए। खेल में सफलता के लिए प्रतिभा, अनुशासन और कड़ी मेहनत जरूरी हैं, लेकिन ईमानदारी, निष्पक्षता और विश्वसनीयता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।”

डॉ. मांडविया ने एशियाई खेलों और एशियाई पैरा खेलों में भारत के चौथे स्थान पर रहने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारतीय खेलों की बढ़ती ताकत और महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। उन्होंने आगे बताया कि 2025‑26 के दौरान नाडा ने 7,000 से अधिक परीक्षण किये और जागरूकता तथा शिक्षा से जुड़े 350 से अधिक सत्र आयोजित किये, जिससे 27,000 प्रतिभागियों तक पहुंच बनाई गई। उन्होंने यह भी बताया कि गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय और हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान में पूरक पदार्थों की जांच की सुविधाएं डोपिंग के मामलों को रोकने में मदद करती हैं।

शिक्षा और खेल के बीच की दूरी कम करेगा समझौता : जोशी

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि यह समझौता शिक्षा और खेल के बीच लंबे समय से बनी दूरी को कम करने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि जमीनी स्तर पर खेल के अवसर बढ़ाने और युवा खिलाड़ियों के लिए आगे बढ़ने के बेहतर रास्ते तैयार करने की आवश्यकता है।

बच्चों को नियमों के अनुसार खेलना सिखाएगा टूलकिट : यूनेस्को

डॉ. टिम कर्टिस ने इस समझौते को भारत के साथ यूनेस्को की साझेदारी का नया अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से लाखों युवाओं तक पहुंच बनाई जा सकती है और यह दूसरे देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है। वह आगे बोले, “कक्षा में बैठा हर बच्चा यह सीख सकता है कि नियमों के अनुसार खेलने का क्या अर्थ है। इस टूलकिट

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