
हैदराबाद, 28 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में भारी वर्षा और तेज़ हवाओं के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बिजली की आपूर्ति कई स्थानों पर बाधित रही है; पेड़ उखड़ गए, सड़कें और मकान क्षतिग्रस्त हुए, तथा फसलें जलमग्न हो गई हैं। रेलवे ने 50 से अधिक ट्रेनों को रद्द किया है और कई उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं।
राज्य सरकार ने राहत और बचाव कार्य को तेज़ी से आगे बढ़ाया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की अतिरिक्त सहायता और नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम भेजने का अनुरोध किया है।
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात के केंद्र के चारों ओर हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच है, जो तेज़ झोंकों के साथ 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में लगभग 31 मकानों को नुकसान पहुँचाया गया है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है।
दक्षिण मध्य रेलवे ने विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम से गुजरने वाली 50 से अधिक ट्रेनों को रद्द कर दिया है। राजामुद्री, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम के बीच आने-जाने वाली दो दर्जन से अधिक उड़ानें भी रद्द हुई हैं।
राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियाँ भारी बारिश, तेज़ हवाओं और संभावित बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए अलर्ट पर हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर बताया कि सरकार चक्रवात अर्नब से प्रभावित लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है।
उन्होंने कहा कि वे लगातार स्थिति पर नज़र रख रहे हैं, रातभर समीक्षा करते हुए जिला कलेक्टरों, वरिष्ठ अधिकारियों और जमीनी स्तर पर कार्यरत टीमों से संपर्क में हैं। राज्य सरकार के मंत्री मौके पर मौजूद रहकर राहत और पुनर्वास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
हज़ारों अधिकारी, आपातकालीन प्रतिक्रिया दल और अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मचारी रातभर और भारी बारिश के बीच लगातार काम कर रहे हैं। सड़कों से मलबा हटाने, बिजली आपूर्ति बहाल करने और लोगों की समस्याओं का समाधान करने के प्रयास जारी हैं।
पहले से की गई तैयारियों और विभागों के बीच समन्वय के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं; अब तक किसी की जान जाने की सूचना नहीं मिली है। सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और तुरंत राहत पहुँचाना है।
मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि सामान्य स्थिति बहाल होने तक सरकारी तंत्र चौबीसों घंटे काम करता रहेगा। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से सतर्क रहने, सुरक्षित स्थानों पर रहने, प्रशासन के दिशा‑निर्देशों का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की।
इसके अलावा, सरकार ने राज्यभर में 2,199 चक्रवात आश्रय स्थल तैयार किए हैं। संवेदनशील 14 जिलों में राहत और बचाव दल तैनात हैं; एनडीआरएफ की 12 और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की 10 टीमें तैनात हैं।
चक्रवात के प्रभाव से श्रीकाकुलम जिले में भारी बारिश और तेज़ हवाओं ने व्यापक नुकसान पहुँचाया है। कई इलाकों में धान के खेत पानी में डूब गए हैं, जिससे फसलों को नुकसान की आशंका है। प्रशासन ने जिले के 167 गांवों में बाढ़ अलर्ट जारी किया है।
विशाखापत्तनम में 27 अक्टूबर की सुबह 8:30 बजे से 28 अक्टूबर की सुबह 3 बजे तक लगभग 18 घंटे में 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। यह आँकड़ा जुलाई में यहाँ होने वाली औसत मासिक बारिश 133 मिलीमीटर से डेढ़ गुना से भी अधिक है। लगातार बारिश के कारण जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
