
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। चक्रवात अर्नब ने पुडुचेरी के यनम के पास समुद्र तट को पार कर लिया है और अगले छह घंटे में यह अपनी तीव्रता घटाकर गहरे दबाव के क्षेत्र में बदल जाएगा, ऐसा अनुमान लगाया गया है। इस तूफ़ान का सबसे अधिक प्रभाव आंध्र प्रदेश में पड़ा, जहाँ तीन लोगों की मौत हुई और 31 मकान क्षतिग्रस्त हुए। राज्य के कई हजार लोग सुरक्षित आश्रयस्थलों में स्थानांतरित किए जा चुके हैं।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के महानिरीक्षक नरेन्द्र सिंह बुंदेला ने बुधवार को कहा कि आंध्र प्रदेश के उत्तरी हिस्से और ओडिशा के दक्षिणी भाग में सबसे अधिक नुकसान देखा गया है। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश में तीन व्यक्तियों की मृत्यु हो गई और 31 मकानों को नुकसान पहुँचा। लगभग 57 हज़ार लोग को राहत शिविरों में रखा गया है।
बुंदेला ने यह भी कहा कि चक्रवात की प्रगति को देखते हुए केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ और रक्षा बलों की सहायता से मंगलवार रात आंध्र प्रदेश में चार अतिरिक्त टीमें भेजी। इन टीमों को भारतीय वायु सेना के विमानों से पहुंचाया गया। दोनों राज्यों में राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय से एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत‑बचाव कार्यों में जुटी हैं, जबकि आंध्र प्रदेश सरकार ने एसडीआरएफ की 80 टीमें तैनात की हैं।
बुंदेला ने बताया कि आंध्र प्रदेश और ओडिशा के अलावा छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना, पुडुचेरी और अंडमान‑निकोबार द्वीपसमूह में कुल 39 एनडीआरएफ टीमें तैनात हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार ओडिशा पर चक्रवात का कोई गंभीर असर नहीं पड़ा। आंध्र प्रदेश के कुछ जिलों में तेज़ हवाओं के साथ बारिश जारी है और यनम में बारिश के कारण फँसे 38 लोग मंगलवार शाम तक सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए।
बुंदेला ने कहा कि बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है; गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों और औषधालयों में एहतियात के तौर पर भेजा जा रहा है। निचले क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित आश्रयों में ले जाया जा रहा है और मछली पकड़ने वाली नौकाओं को किनारे या सुरक्षित स्थानों पर रखने का निर्देश जारी किया गया है। स्थानीय एजेंसियां लोगों को सतर्क करने और सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक करने में सक्रिय हैं।
इस बीच चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार सुबह चक्रवात से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की, 32 हज़ार कर्मचारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस करके सामान्य स्थिति बहाल करने और नुकसान कम करने के निर्देश जारी किए। उन्होंने इस दौरान अमित शाह को फोन कर स्थिति की जानकारी दी और विशाखापत्तनम, कोनासीमा, काकीनाडा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, एलुरु तथा कृष्णा जिलों की स्थिति पर चर्चा की।
प्रारंभिक आकलन से पता चलता है कि आंधर प्रदेश में 70 हज़ार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जबकि लगभग 10,500 हेक्टेयर बागवानी फसलें प्रभावित हुई हैं। घरों, सड़कों और बिजली के खंभों को भी क्षति पहुँची है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने जान‑माल के नुकसान को घटाने के लिए व्यापक एहतियाती कदम उठाए हैं।
