वॉशिंगटन। अमेरिका में तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से करीब एक सप्ताह पहले संघीय चुनाव आयोग (एफईसी) के इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम पर साइबर हमले की कोशिश का मामला सामने आया है। इसके बाद आयोग को अपनी ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ीं। इससे राजनीतिक दलों और संगठनों के चुनावी चंदे व खर्च का ब्योरा दर्ज करने वाली व्यवस्था प्रभावित हुई है।
रॉयटर्स को मिले एक ईमेल के मुताबिक, हैकरों ने एफईसी के सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश की। आयोग ने बताया कि उसकी आईटी टीम सिस्टम को बहाल करने में जुटी है। हालांकि, वेबसाइट पर पुरानी चुनावी खर्च रिपोर्ट उपलब्ध रहीं।
सिस्टम बहाल करने में जुटा आयोग
एफईसी ने अपने बयान में कहा, “इस समय आयोग का इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम बंद है और हमारी आईटी टीम सेवा बहाल करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।”
आयोग के एक अधिकारी ने चुनावी नियमों का अनुपालन कराने वाली कंपनियों को भेजे ईमेल में बताया कि सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश के कारण इंटरनेट के जरिए उपलब्ध सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ीं। सिस्टम सोमवार रात करीब 10 बजे से बंद था। मंगलवार रात आयोग ने कहा कि समस्या की पहचान कर ली गई है और उसे ठीक करने का काम जारी है। हालांकि, वेबसाइट पर जारी सूचना के अनुसार, फाइलिंग सिस्टम तब भी बंद था।
मतदान पर सीधा असर नहीं, खर्च की रिपोर्टिंग में बाधा
एफईसी अमेरिका में मतदान कराने वाली संस्था नहीं है। ऐसे में इस तकनीकी गड़बड़ी से मतदाताओं के वोट डालने की क्षमता प्रभावित होने की आशंका नहीं है। हालांकि, सिस्टम बंद होने से राजनीतिक संगठनों के लिए चुनावी खर्च की अनिवार्य रिपोर्ट समय पर दाखिल करना मुश्किल हो गया है। इनमें 24 घंटे और 48 घंटे के भीतर जमा की जाने वाली रिपोर्ट भी शामिल हैं।
इन रिपोर्टों से पता चलता है कि राजनीतिक समूह चुनावों पर कितना पैसा खर्च कर रहे हैं और धन खर्च करने वाले संगठन कौन हैं। राजनीतिक वित्तीय नियमों का अनुपालन कराने वाली कंपनी एमबीए कंसल्टिंग ग्रुप के अध्यक्ष एवं सीईओ स्टीवन मेले ने कहा, “मैंने अपने 26 साल के करियर में ऐसा कभी नहीं देखा।”
रिकॉर्ड खर्च के बीच सामने आया मामला
इस बार अमेरिकी मध्यावधि चुनाव पर रिकॉर्ड खर्च होने का अनुमान है। राजनीतिक विज्ञापनों पर नजर रखने वाली संस्था एडइम्पैक्ट के मुताबिक, विज्ञापनों और भविष्य के लिए किए गए आरक्षणों पर अब तक करीब 11.21 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। यह 2024 के चुनावों में हुए 11.2 अरब डॉलर के कुल खर्च से अधिक है।
इस खर्च में सुपर पीएसी और डार्क मनी समूहों की बड़ी भूमिका है। सुपर पीएसी धनी व्यक्तियों और कंपनियों से असीमित धन जुटाकर चुनावी अभियानों पर खर्च कर सकते हैं, जबकि डार्क मनी समूहों के वित्तीय स्रोतों की पहचान करना अपेक्षाकृत कठिन होता है।
रोजाना करोड़ों डॉलर खर्च कर रहे राजनीतिक समूह
गैर-दलीय चुनाव निगरानी संस्था ओपनसीक्रेट्स के शोध निदेशक ब्रेंडन ग्लेविन के मुताबिक, पिछले सप्ताह सुपर पीएसी और डार्क मनी समूहों ने औसतन प्रतिदिन पांच करोड़ डॉलर से अधिक खर्च किए। उनके अनुसार, 20 अक्टूबर को ही 25 करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च की रिपोर्ट सामने आई थी।
तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव में तय होगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी संसद में अपना बहुमत बनाए रख पाएगी या नहीं। ऐसे अहम चुनाव से पहले चुनावी वित्तीय रिपोर्टिंग सिस्टम का बंद होना पारदर्शिता और समय पर खर्च का ब्योरा उपलब्ध कराने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तकनीकी समस्या का असर चुनावी खर्च की रिपोर्टिंग पर पड़ा है, मतदान प्रक्रिया पर सीधे असर की पुष्टि नहीं हुई है।
