
भुवनेश्वर, 25 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भुवनेश्वर में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के डेटा सेंटर तथा साइबर‑सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का औपचारिक उद्घाटन किया। उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा कि ये दोनोँ सुविधाएँ देश की बैंकिंग प्रणाली को अधिक सुरक्षित, कुशल और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभाएँगी। मोदी ने बताया कि पूर्वी भारत, विशेषकर ओडिशा, प्राकृतिक संसाधनों के साथ‑साथ प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी तेज़ी से विकास कर रहा है, जहाँ “माइन्स से माइक्रो‑चिप्स तक” का नया परिदृश्य उभर रहा है।
समारोह में ओडिशा के राज्यपाल ब्रजमोहन राम, मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, मंत्रिपरिषद के सदस्य जुएल ओरांव, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा, उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा और कंक वर्धन सिंह देव सहित कई वरिष्ठ वित्तीय अधिकारियों ने भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया के इको‑सिस्टम ने डिजिटल बैंकिंग को हर नागरिक तक पहुँचाया है। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले आधे से अधिक जनसंख्या बैंकिंग से बाहर थी, जबकि अब जन‑धन खाते की संख्या 59‑60 करोड़ तक पहुँच गई है और सरकारी योजनाओं का पूरा पैसा सीधे खाताधारकों तक पहुँच रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से 13 करोड़ लोगों ने पहली बार उद्यमी के रूप में पंजीकरण किया, PM स्वनिधि योजना ने रेहड़ी‑पटरी वालों को ऋण उपलब्ध कराया, और PM विश्वकर्मा योजना ने पारम्परिक कारीगरों को बैंकिंग से जोड़ा।
सामाजिक सुरक्षा की बात करते हुए मोदी ने कहा कि आटल पेंशन योजना के तहत भारत में नौ करोड़ लोग कवर किए गए हैं, जिसमें ओडिशा के लगभग 38 लाख लोग शामिल हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (₹20 वार्षिक प्रीमियम, ₹2 लाख तक कवरेज) और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (₹450 से कम प्रीमियम) का उल्लेख किया, जिससे अब तक 25 000 करोड़ रुपये से अधिक के दावे भुगतान किए जा चुके हैं।
डेटा सेंटर और प्रशिक्षण संस्थान के महत्व को रेखांकित करते हुए मोदी ने कहा, “आर्थिक शक्ति बढ़ेगी तो साइबर अपराधियों और साइबर‑आतंकवादियों से रक्षा करना उतना ही जरूरी होगा।” उन्होंने कहा कि नई सुविधाएँ ओडिशा को “खनन‑से‑माइक्रोचिप” विकास मॉडल के साथ एक प्रमुख तकनीकी हब बनाने में सहायक होंगी और राज्य के युवाओं के लिए रोजगार एवं निवेश के नए अवसर सृजित करेंगी। अंत में उन्होंने सभी सहभागियों को बधाई देते हुए आश्वासन दिया कि ये पहलें भारत की बैंकिंग व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में निर्णायक सिद्ध होंगी।
