Thursday, July 16खबर जो असर करे |
Shadow

केन्द्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विन्डफॉल टैक्स घटाया…. डीजल और ATF पर बढ़ाया

नई दिल्ली। मोदी सरकार (Modi Government) ने बुधवार को डीजल (Diesel) और विमान में इस्तेमाल होने वाले ईंधन (Aviation fuel) ATF के निर्यात पर लगने वाले विन्डफॉल टैक्स (Windfall tax) को बढ़ा दिया है, जबकि पेट्रोल के निर्यात पर यह टैक्स घटा दिया। यह फैसला 16 जुलाई यानी आज से लागू हो गया है। यह हर 15 दिन पर होने वाली समीक्षा का हिस्सा है।


वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर विन्डफॉल टैक्स घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यह पहले 4 रुपये था। वहीं, डीजल पर यह शुल्क 8.5 रुपये से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। जबकि, विन्डफॉल टैक्स एटीएफ पर 7.5 रुपये से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। बता दें इससे आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।


क्यों किया टैक्स में बदलाव
यह टैक्स में बदलाव ऐसे समय आया है, जब वैश्विक तेल बाजार काफी अस्थिर है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत करीब 2% बढ़कर 84.73 डॉलर प्रति बैरल के एक महीने के हाई पर पहुंच गई। इसकी वजह थी कि अमेरिका ने ईरान पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू कर दी, जिससे होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई पर खतरा पैदा हो गया। इस रास्ते दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई होती थी।


इसके अलावा, नए भू-राजनीतिक तनाव और तेल टैंकरों पर हमलों ने भी कीमतों को सहारा दिया, हालांकि महंगाई की चिंताओं और वैश्विक मांग में सुस्ती ने बढ़त को सीमित रखा। रूस के कम निर्यात जैसी सप्लाई की दिक्कतों से डीजल की रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ा है, जिससे ऑयल मार्केट पर दबाव बना हुआ है।


थोक खरीद पर रोक और बाद में राहत
केंद्र सरकार ने 11 जून को औद्योगिक, कमर्शियल और संस्थागत उपभोक्ताओं को खुदरा ईंधन पंपों से पेट्रोल-डीजल खरीदने से रोक दिया था और उन्हें थोक सप्लाई चैनलों से खरीदारी करने का निर्देश दिया था। यह अस्थायी आदेश ईंधन की उचित उपलब्धता सुनिश्चित करने, जमाखोरी और अवैध हेर-फेर रोकने तथा आम उपभोक्ताओं के लिए निर्बाध सप्लाई बनाए रखने के लिए जारी किया गया था।


सरकार ने कहा था कि ग्लोबल सप्लाई चेन और शिपिंग पर भू-राजनीतिक स्थिति का बुरा असर पड़ रहा है, जिससे आपूर्ति असंतुलन का खतरा बढ़ गया है। दरअसल, थोक खरीदारों और खुदरा दरों के बीच बड़े अंतर के कारण बड़े उपभोक्ता अपनी खरीदारी नियमित थोक चैनलों से हटाकर खुदरा पंपों पर कर रहे थे, जिससे खुदरा बिक्री असामान्य रूप से बढ़ गई थी। उस समय दिल्ली में रिटेल डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर था, जबकि थोक खरीदारों को 134.50 रुपये प्रति लीटर चुकाना पड़ रहा था।


यह अंतर इसलिए पैदा हुआ, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से आम उपभोक्ताओं को ईंधन की महंगाई से बचाने के लिए रिटले रेट को नियंत्रित रखा। जबकि, थोक खरीदार बाजार-आधारित दरों का भुगतान करते रहे। इस आदेश के तहत, खुदरा पंपों से डीजल बिक्री केवल वाहन ईंधन टैंक या पीईएसओ अप्रूब्ड कंटेनरों तक सीमित कर दी गई।


वहीं डीजल पर 200 लीटर की खरीद सीमा तय कर दी गई। यह प्रतिबंध 90 दिनों तक प्रभावी रह सकता था और नए आदेश से बढ़ाया भी जा सकता था। उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सजा का प्रावधान था। बाद में, 29 जून को ये पाबंदियां हटा ली गईं और 1 जुलाई से वापस सामान्य व्यवस्था लागू हो गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *