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दतिया।दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर मध्य प्रदेश का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है।मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला तय हो गया है। कांग्रेस ने अनुभवी और पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, वहीं भाजपा ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है।दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने दो बार के पूर्व विधायक और राजघराने से जुड़े घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी टिकट वितरण के बाद मचे अंदरूनी घमासान को शांत करने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने अपना बड़ा दांव खेलते हुए पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया है। घनश्याम सिंह के मैदान में आने से दतिया उपचुनाव का मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का हो गया है।कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह दतिया के सियासी गलियारों में एक बड़ा और जाना-पहचाना नाम हैं। वह दो बार के विधायक रह चुके हैं और उनका ताल्लुक तत्कालीन रियासत दतिया राजघराने से है। क्षेत्र में उनकी पहचान एक शांत, शालीन और लगातार सक्रिय रहने वाले जमीनी नेता के रूप में होती है। कांग्रेस आलाकमान ने स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ और जनता के बीच उनकी साफ- सुथरी छवि को देखते हुए ही उन पर दोबारा भरोसा जताया है।आशुतोष तिवारी को भाजपा संगठन में एक मजबूत और समर्पित कार्यकर्ता माना जाता हैं।वे छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं से जुड़े रहे है। भोपाल और ग्वालियर संभाग के संभागीय संगठन मंत्री रहे हैं।मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन भी रह चुके हैं।इससे पहले शनिवार को ही भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर एक हाई-लेवल सीक्रेट मीटिंग हुई, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के साथ डॉ. नरोत्तम मिश्रा की लंबी चर्चा हुई। इस बैठक के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने कड़ा संदेश देते हुए साफ कर दिया है कि प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ही रहेंगे और कार्यकर्ताओं के भावावेश में दिए गए इस्तीफे संगठन स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मार्गदर्शन में ही लड़ा जाएगा।
