चेन्नई। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाले तमिलनाडु (Tamil Nadu ) के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (Chief Minister C. Joseph Vijay) के सामने अब अपनी ही पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (Party ‘Tamilaga Vettri Kazhagam’- TVK) के अंदर से बगावत के सुर उठने लगे हैं। विल्लुपुरम जिले में सरकारी वकीलों की नियुक्ति में 30 लाख रुपये तक की घूसखोरी का बड़ा आरोप लगाते हुए TVK की ही एक महिला सदस्य ने मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) का दरवाजा खटखटाया है। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि इस कथित भर्ती घोटाले में याचिकाकर्ता ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए, खुद सीएम विजय और उनके कानून विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री और TVK प्रमुख सी. जोसेफ विजय को भी पक्षकार बनाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, विल्लुपुरम में प्रैक्टिस करने वाली वकील एम. ज्ञानसुंदरी ने मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी याचिका में तमिलनाडु के कानून विभाग, विल्लुपुरम के जिला कलेक्टर, TVK अध्यक्ष व मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, TVK महासचिव एन. आनंद और पार्टी के विल्लुपुरम जिला सचिव एन. मोहनराज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। ज्ञानसुंदरी ने कोर्ट से मांग की है कि कानून विभाग और जिला कलेक्टर द्वारा जारी नोटिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगाई जाए और उन्हें भी चयन प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया जाए।
डेडलाइन खत्म होने से पहले ही WhatsApp पर आ गई लिस्ट
याचिकाकर्ता ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कई बड़े दावे किए हैं। विल्लुपुरम जिले में सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए 5 जून को विज्ञापन जारी किया गया था। ज्ञानसुंदरी ने 22 जून को महिला कोर्ट के लिए विशेष लोक अभियोजक और 29 जून को विल्लुपुरम के प्रिंसिपल और सब-कोर्ट के लिए अतिरिक्त लोक अभियोजक के पद के लिए आवेदन किया था। उन्होंने दावा किया कि कलेक्टर कार्यालय में अपने बायोडाटा और दस्तावेजों की 6 कॉपियां जमा करने के बावजूद उन्हें कोई पावती नहीं दी गई।
सबसे बड़ा आरोप यह है कि आवेदन की आखिरी समय सीमा 29 जून शाम 5:45 बजे थी, लेकिन उसी दिन दोपहर 12:11 बजे ही व्हाट्सएप ग्रुप्स में चयनित उम्मीदवारों की एक लिस्ट वायरल हो गई। यह साबित करता है कि प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही चयन फाइनल कर लिया गया था।
5 से 30 लाख रुपये तक वसूली का गंभीर आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि वकीलों के चयन में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। आरोप है कि प्रत्येक पद के लिए 5 लाख से लेकर 30 लाख रुपये तक की घूस ली गई है। ज्ञानसुंदरी का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने वायरल लिस्ट को लेकर TVK के जिला सचिव से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि यही फाइनल लिस्ट है। आरोप यह भी है कि बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए डीएमके (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) से जुड़े वकीलों को चुन लिया गया है।
सीएम विजय को क्यों बनाया गया पक्षकार?
याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री विजय को इस मामले में प्रतिवादी इसलिए बनाया है क्योंकि वह राज्य के सीएम होने के साथ-साथ TVK के अध्यक्ष भी हैं। विजय लगातार भ्रष्टाचार और गैर-कानूनी कामों के खिलाफ बोलते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद विल्लुपुरम में सरकारी वकीलों के चयन में अधिकारियों द्वारा खुलेआम अवैध तरीके अपनाए जा रहे हैं। बता दें कि याचिकाकर्ता ज्ञानसुंदरी की ओर से यह याचिका वकील ए. रमेशमणिकंदन और आर. अनंतलक्ष्मी के जरिए हाई कोर्ट में दाखिल की गई है।
