फरीदाबाद। पुलिस विभाग के मालखानों (Police Evidence rooms) से आभूषण और शराब चोरी होने की खबरें तो आपने सुनी होंगी, लेकिन फरीदाबाद (Faridabad) के सेक्टर-8 थाने के मालखाने से 32 लाइसेंसी हथियार (Licensed weapon) ही चोरी हो गए। इनमें दो लाख के हथियार से लेकर 10-12 लाख रुपये तक की विदेशी पिस्टल तक थीं।
आम लोगों ने इन हथियारों को थाने में इसलिए स्वतः जमा कराया था, ताकि उनके असलहे सुरक्षित रहें और जरूरत के अनुसार फिर वापस ले सकें। लेकिन, यहां तो पुलिस ने ही एक-एक कर इन हथियारों पर हाथ साफ कर दिया। शुरुआती जांच के बाद थाने के मालखाना प्रभारी एसआइ बिजेंद्र सिंह के खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज कर निलंबित कर दिया गया है। उसके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है।
आशंका है कि ये हथियार एक से दूसरे को बिकते हुए राजस्थान, नोएडा सहित दिल्ली-एनसीआर में कई अपराधियों तक पहुंच चुके हैं। इनमें सामान्य पिस्टल से लेकर 10-12 लाख रुपये कीमत की विदेशी पिस्टल भी शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि हथियार एक साथ नहीं, बल्कि दो-तीन महीने के दौरान एक-एक, दो-दो करके गायब किए गए। सीसीटीवी कैमरों से लैस थाने से रोज हथियार चोरी होते रहे और किसी को पता नहीं चला, यह बड़ा सवाल है। इससे थाने के बड़े अधिकारियों सहित अन्य कर्मियों की भूमिका पर भी संदेह के घेरे में है। कुछ दिन पहले नियमित जांच के दौरान हथियारों की संख्या में गड़बड़ी सामने आई।
शुरुआत में 13 हथियार गायब होने का पता चला, गहन जांच में संख्या बढ़कर 32 तक पहुंच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों ने तत्काल जांच शुरू कराई। जांच के दौरान संदेह की सुई सीधे मालखाना प्रभारी पर जाकर टिकी। सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच में उसी की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। फजीहत से बचने के लिए पुलिस पूरे मामले की जांच बेहद गोपनीय तरीके से कर रही है।
जांच टीम को वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मामले से जुड़ी जानकारी बाहर न जाए। फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती गायब हथियारों की बरामदगी है। अगर ये हथियार आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हुए तो पुलिस को गंभीर सवालों का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से जांच एजेंसियों पर जल्द से जल्द सभी हथियार बरामद करने का भारी दबाव बना हुआ है।
