नई दिल्ली। किसी सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए फैमिली पेंशन की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कमाने वाले सदस्य के निधन के बाद परिवार को नियमित आर्थिक सहायता मिलती रहे। हालांकि आम धारणा के विपरीत फैमिली पेंशन केवल पति या पत्नी तक सीमित नहीं होती। निर्धारित शर्तों के तहत बच्चों, दिव्यांग आश्रितों और कुछ मामलों में माता-पिता को भी इसका लाभ मिल सकता है।
क्या होती है फैमिली पेंशन?
फैमिली पेंशन वह मासिक वित्तीय सहायता है, जो किसी सरकारी कर्मचारी या पेंशन प्राप्त कर रहे व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके पात्र आश्रितों को दी जाती है। यह कर्मचारी की स्वयं की पेंशन से अलग होती है और केवल मृत्यु के बाद लागू होती है। केंद्र सरकार, राज्य सरकार, रक्षा सेवाओं और ईपीएफओ जैसी विभिन्न योजनाओं में इसके नियम अलग-अलग हो सकते हैं।
सबसे पहले किसे मिलता है अधिकार?
कर्मचारी के निधन के बाद सबसे पहले उसके पति या पत्नी को फैमिली पेंशन का अधिकार मिलता है। अधिकांश सरकारी नियमों के तहत विधवा या विधुर को निर्धारित शर्तों के अनुसार पेंशन दी जाती है। कुछ योजनाओं में पुनर्विवाह के बाद भी पेंशन जारी रखने के अलग प्रावधान हैं।
किन बच्चों को मिलता है लाभ?
यदि जीवनसाथी के बाद पात्रता बनती है, तो बच्चों को भी फैमिली पेंशन मिल सकती है।
- अविवाहित बेटा 25 वर्ष की आयु तक, यदि वह स्वयं कमाने में सक्षम नहीं है।
- बेटी को 25 वर्ष की आयु तक या विवाह होने तक, जो पहले हो।
- उद्देश्य यह है कि बच्चों को आत्मनिर्भर बनने तक आर्थिक सहायता मिलती रहे।
दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था
यदि बेटा या बेटी शारीरिक अथवा मानसिक रूप से दिव्यांग है और अपनी आजीविका चलाने में सक्षम नहीं है, तो निर्धारित चिकित्सीय प्रमाणपत्र के आधार पर उसे आजीवन फैमिली पेंशन मिल सकती है।
अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटी भी हो सकती है पात्र
यदि बेटी की आयु 25 वर्ष से अधिक है, लेकिन वह अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा है तथा उसकी आय सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से कम है, तो वह भी फैमिली पेंशन की पात्र हो सकती है।
कब मिलता है माता-पिता को लाभ?
यदि मृत कर्मचारी के पीछे न पति या पत्नी हों और न ही कोई पात्र संतान, तो आर्थिक रूप से उस पर निर्भर माता-पिता फैमिली पेंशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपनी निर्भरता का प्रमाण प्रस्तुत करना होता है।
गोद लिए और सौतेले बच्चों के लिए भी प्रावधान
यदि किसी बच्चे को विधिक रूप से गोद लिया गया हो या वह सौतेला बच्चा होने के बावजूद कर्मचारी पर आश्रित रहा हो, तो आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर उसे भी फैमिली पेंशन का लाभ मिल सकता है।
किन्हें नहीं मिलता लाभ?
सामान्य नियमों के अनुसार निम्न श्रेणी के लोग फैमिली पेंशन के पात्र नहीं होते—
- 25 वर्ष से अधिक आयु का सक्षम एवं स्वावलंबी बेटा
- विवाहित बेटी (जब तक संबंधित योजना में विशेष प्रावधान न हो)
- भाई-बहन या अन्य रिश्तेदार, जो कर्मचारी पर आर्थिक रूप से निर्भर न रहे हों
कितनी मिलती है फैमिली पेंशन?
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए सामान्यतः फैमिली पेंशन अंतिम मूल वेतन (Last Drawn Basic Pay) का 30 प्रतिशत होती है। उदाहरण के तौर पर यदि कर्मचारी का अंतिम मूल वेतन 50,000 रुपये था, तो सामान्य फैमिली पेंशन लगभग 15,000 रुपये प्रतिमाह हो सकती है।
कुछ विशेष परिस्थितियों में कर्मचारी की मृत्यु के बाद शुरुआती सात वर्षों तक अथवा कर्मचारी के 67 वर्ष की आयु पूरी होने तक (जो पहले हो) बढ़ी हुई दर (Enhanced Family Pension) के तहत अंतिम मूल वेतन का 50 प्रतिशत तक भुगतान किए जाने का भी प्रावधान है।
