नवरात्रि पर्व पर साधना से मिलता है अभीष्ट फल
- श्रीराम माहेश्वरी
भारतीय संस्कृति में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक यह पर्व मनाया जाता है । एक संवत्सर में चार नवरात्र होते हैं। आश्विन का नवरात्र शारदीय नवरात्र तथा चैत्र का नवरात्र वासंतिक नवरात्र कहा जाता है । दो गुप्त नवरात्रि होती है । इस पर्व में मां दुर्गा की आराधना करने का विधान है।
आध्यात्मिक दृष्टि से शक्ति का स्वरूप विशेष दिव्य और उदात्त है। शक्ति ही सृष्टि का सृजन करती है। मां जगत जननी ही सृष्टि का आदि कारण है। यह शक्ति ही पराशक्ति है । इसके अनेक स्वरूप हैं। मां दुर्गा, काली, गायत्री, तारा, भुवनेश्वरी, बगला, षोडशी, धूमावती, त्रिपुरा, कमला, मातंगी तथा पद्मावती इन्हीं के रूप हैं। नवरात्रि के इन दिनों में श्री महालक्ष्मी, श्री मां सरस्वती, महिषासुरमर्दिनी, मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कुष्मांडा, मां स्कंदमाता...









