डिजिटल पैमेंट के साथ धोखाधड़ी भी बढ़ी…. बचने के लिए खर्च और बचत खाता अलग जरूरी
नई दिल्ली। भारत (India) में डिजिटल क्रांति (Digital Revolution) ने लेनदेन की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। जेब में नकदी की जगह अब स्मार्टफोन (Smart fone) और क्यूआर कोड (QR code) ने ले ली है। लेकिन इस अभूतपूर्व सुविधा के साथ एक कड़वी हकीकत यह भी है कि साइबर अपराधियों के लिए हमलों का दायरा पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
धोखाधड़ी से जुड़े आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को साफ उजागर करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से नवंबर के बीच यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिये 805 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 10.64 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए। ये आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं कि चूक तकनीकी से ज्यादा हमारे वित्तीय प्रबंधन और लापरवाही के स्तर पर हो रही है।
खर्च खाता और बचत खाता अलग करना क्यों जरूरी?आज सबसे बड़ी गलती यह हो रही है कि आम नागरिक एक ही बैंक खाते में सैलरी ले रहा है, उसी में जीवनभर क...









