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Tag: भारतीय संस्कृति

दुर्गा पूजा 2026 : “वंदे मातरम - मेरा भारत, भविष्य का भारत” थीम के साथ वृंदावन गार्डन दुर्गा पूजा का उद्घाटन

दुर्गा पूजा 2026 : “वंदे मातरम - मेरा भारत, भविष्य का भारत” थीम के साथ वृंदावन गार्डन दुर्गा पूजा का उद्घाटन

यात्रा
कोलकाता, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। कोलकाता के वीआईपी बाज़ार में स्थित वृंदावन गार्डन दुर्गा पूजा समिति ने इस वर्ष की दुर्गा पूजा का उद्घाटन विशेष ‘वंदे मातरम - मेरा भारत, भविष्य का भारत’ थीम के साथ किया। इस थीम का चयन ‘वंदे मातरम’ के 150वें वर्ष पर भारत के गौरव एवं भविष्य की झलक पेश करने के उद्देश्य से किया गया है, जिससे राष्ट्रीय जागरूकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की भावना को बल मिलता है। समिति के अध्यक्ष ने उद्घाटन समारोह में कहा, “आज हम अपने देश के महान इतिहास को सम्मानित कर रहे हैं और साथ ही भविष्य की ओर एक नई दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं। ‘वंदे मातरम’ की ध्वनि हमारे दिलों में गूँज रही है, और इस ध्वनि को हम दुर्गा पूजा मंडप में सुनाने के लिए गर्व महसूस कर रहे हैं।” इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने भी इस विचारधारा की सराहना की और कहा कि यह पहल राष्ट्रीय एकता तथा सांस्कृतिक समरसता को...
राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की दुर्गापूजा परंपरा: जड़ों से कभी न कटती पावन भावना

राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की दुर्गापूजा परंपरा: जड़ों से कभी न कटती पावन भावना

नवाचार
सीवान, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। देश के प्रथम राष्ट्रपति एवं देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद का अपनी जन्मभूमि, अपनी मिट्टी और भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव रहा है। वे जब 1950 में भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुँचे, तब भी अपनी जड़ों और धार्मिक परंपराओं को नहीं भूले। इस लगाव का सबसे स्पष्ट प्रमाण उनकी दुर्गापूजा परंपरा है, जिसे वह हर साल जीरादेई में मनाते आएँ। डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गाँव में हुआ था। बचपन से ही वे माँ-बाप की खेती‑किसानी और गाँव के सामाजिक जीवन में गहरी रुचि रखते थे। उनके परिवार में हर वर्ष शरद ऋतु में दुर्गा माता की पूजा का विशेष आयोजन होता था, जिसमें गाँव के सभी लोग भाग लेते थे। यह परंपरा उनके दिल में गहरी जड़ें जमा गई और बाद में जब वह स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेकर भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने, तब भी उन्होंने इस परम्पर...
विश्व प्रसिद्ध 416वें नाडहब्बा दशहरा उत्सव का औपचारिक उद्घाटन

विश्व प्रसिद्ध 416वें नाडहब्बा दशहरा उत्सव का औपचारिक उद्घाटन

राष्ट्रीय
मैसूर, 12 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। कर्नाटक के मैसूर में 416वें नाडहब्बा दशहरा महोत्सव का आधिकारिक शुभारंभ रविवार को हुआ। चामुंडी पहाड़ी पर आयोजित समारोह में कोप्पल के गविमठ के अभिनव गविसिद्धेश्वर महास्वामीजी और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उपस्थित दर्शकों के सामने पंक्तिबद्ध दीपों और पिचकारी जलाने के साथ इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य प्रस्तुतियां और पारंपरिक संगीत का मंचन किया गया, जिससे इस महोत्सव की भव्यता और कर्नाटक की सांस्कृतिक धरोहर की प्रशंसा हुई।...
‘भारत पर्व’ संपन्न: कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर का संगम

‘भारत पर्व’ संपन्न: कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर का संगम

राष्ट्रीय
नई दिल्ली, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में लाल किले में आयोजित 'भारत पर्व' के समापन समारोह के दौरान कर्नाटक का शास्त्रीय नृत्य, आंध्र प्रदेश का कुचिपुड़ी नृत्य और झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों का सम्मिश्रण देखने को मिला। यह राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक, कलात्मक और पर्यटन विरासत का एक जीवंत प्रदर्शन रहा। पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक यह सांस्कृतिक कार्यक्रम 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संस्कृति, पर्यटन, व्यंजन, हथकरघा और विरासत को दर्शाने वाला एक भव्य राष्ट्रीय मंच था। कर्नाटक सरकार के कन्नड़, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से शास्त्रीय नृत्य, संगीत और पारंपरिक लोक प्रदर्शनों का आयोजन किया गया, जिसमें कन्नड़ कलाकारों ने जीवंत प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शात...
मातृशक्ति का समाज में योगदान, संवेदनशीलता माताओं का स्वाभाविक गुण: भैय्याजी जोशी

मातृशक्ति का समाज में योगदान, संवेदनशीलता माताओं का स्वाभाविक गुण: भैय्याजी जोशी

राष्ट्रीय
उज्जैन, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भैय्याजी जोशी ने मातृशक्ति की भूमिका को समाज की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता हर माता का स्वाभाविक गुण है। प्रकृति ने महिला को ऐसा स्वरूप दिया है, जो केवल जन्म ही नहीं देता बल्कि जीवन को संवारता भी है। भैय्याजी जोशी शनिवार को विश्वमांगल्य सभा के मालवा प्रांत के पहले अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। यह अधिवेशन मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में भव्य रूप से प्रारंभ हुआ। शिप्रा तट स्थित ऐतिहासिक झालरिया मठ में आयोजित इस दो दिवसीय आवासीय अधिवेशन में मालवा प्रांत के 10 जिलों से आईं लगभग 1200 मातृशक्तियों ने सहभागिता की। भैय्याजी जोशी ने चिकित्सालयों में परिचारिका की भूमिका का उदाहरण देते हुए कहा कि यह कार्य महिलाएं अधिक कुशलता से निभाती हैं, क्योंकि प...
मुख्यमंत्री योगी से मिले ‘गोदान’ के निर्माता-निर्देशक विनोद चौधरी, फिल्म का ट्रेलर लॉन्च

मुख्यमंत्री योगी से मिले ‘गोदान’ के निर्माता-निर्देशक विनोद चौधरी, फिल्म का ट्रेलर लॉन्च

राष्ट्रीय
लखनऊ, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। निर्माता-निर्देशक विनोद चौधरी ने अपनी फिल्म ‘गोदान’ के संदर्भ में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की, जिसमें फिल्म का ट्रेलर भी लॉन्च किया गया। यह फिल्म गोमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति में उसकी महत्वता और पंचगव्य विज्ञान को उजागर करेगी। विनोद चौधरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गो-रक्षा की दिशा में किए गए कार्यों के लिए योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन और नेतृत्व प्रमुख है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में 7,500 से अधिक गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं, और 12 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया गया है। फिल्म ‘गोदान’ 6 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी और इसके द्वारा गायों के संरक्षण, भारतीय संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया जाएगा। चौधरी ने इस दौरान मुख्यमंत्री को फिल्म का उद्देश्य और सामाजिक संदेश भी बताया। मुख्यमंत्री ने वि...
धर्म ही है सृष्टि का संचालक और भारत के पुनरुत्थान का आधार

धर्म ही है सृष्टि का संचालक और भारत के पुनरुत्थान का आधार

लेख
By: डॉ. मयंक चतुर्वेदी डॉ. मोहन भागवत ने ‘धर्म’ को सृष्टि का संचालक बताया है। उनका कथन है, सृष्टि निर्माण के साथ उसके संचालन के लिए बने नियम ही धर्म हैं। ये नियम विश्वव्यापी हैं। कोई व्यक्ति या वस्तु पूर्णतः अधर्मी नहीं हो सकते। यह प्राचीन ग्रंथों की गहन व्याख्या पर आधारित उनका धर्म के विषय में निष्कर्ष है। श्रीमद्भागवत, मनुस्मृति, पाराशर स्मृति, महाभारत जैसे ग्रंथ ‘धर्म’ को स्वाभाविक नियम के रूप में परिभाषित करते हैं। डॉ. भागवत जी का मूल सूत्र यही है कि ‘धर्म’ ही पूरी सृष्टि का ड्राइवर है। यही श्रीमद्भागवत पुराण में कहा गया है “धर्मः सनातनः सर्वस्य मूलं” अर्थात् धर्म सनातन है और समस्त सृष्टि का मूल। भगवान विष्णु स्वरूप में सृष्टि संचालित करते हैं। नियम ‘धर्म’ के रूप में निर्धारित हैं। यहां डॉ. भागवत जल को बहने और अग्नि को जलाने का ‘धर्म’ बताते हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसा श्रीमद्भागवत पु...
सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने तमिल समुदाय को पोंगल की शुभकामनाएं दीं

सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने तमिल समुदाय को पोंगल की शुभकामनाएं दीं

अंतरराष्ट्रीय
सिंगापुर, 14 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने तमिल समुदाय को पोंगल पर्व की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, '' हमारा तमिल समुदाय जिस पोंगल पर्व को मनाता है, वह परिवार के साथ एकजुट होने, कृतज्ञता व्यक्त करने, अपनी पारंपरिक जड़ों का सम्मान करने और आने वाले आशावादी वर्ष का स्वागत करने का उपयुक्त समय है।'' सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने कहा, ''इस अवसर पर मैं सभी को पोंगल की शुभकामनाएं देता हूं। पोंगल पर्व की भावना का अनुभव करने के लिए लिटिल इंडिया या इंडियन हेरिटेज सेंटर में कुछ समय अवश्यमेव बिताएं।'' उल्लेखनीय है कि भारत के तमिलनाडु में पोंगल पर्व कल ताई थिरुनाल के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए पारंपरिक तरीके से नए मिट्टी के बर्तन में पोंगल बनाकर खुशी और उत्साह के साथ त्योहार मनाया जाता है। तमिलना...
प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं

राष्ट्रीय
नई दिल्ली, 14 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दी हैं। आज देशभर के पवित्र सरोवरों, कुओं और नदियों में डुबकी लगाने के लिए लोगों की भीड़ लगी हुई है। भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट के धार्मिक स्थानों में भी लोग मकर संक्रांति की पूजा करने से पूर्व स्नान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह व्हाट्स ऐप पर संदेश लिखा, '' सभी देशवासियों को मकर संक्रांति की असीम शुभकामनाएं। तिल और गुड़ की मिठास से भरा भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का यह दिव्य अवसर हर किसी के जीवन में प्रसन्नता, संपन्नता और सफलता लेकर आए। सूर्य देव सबका कल्याण करें।'' मकर संक्रांति पर चित्रकूट के भरतकूप पर पांच दिवसीय मेले की शुरुआत हो गई है। चित्रकूट के रामघाट पर स्नानार्थियों की भीड़ सुबह से जुटी है। भरतकूप पर पांच तीर्थों के पवित्र जल से स्नान की ...
अयोध्या श्री राम मंदिर: वैश्विक शांति और समृद्धि की नींव

अयोध्या श्री राम मंदिर: वैश्विक शांति और समृद्धि की नींव

लेख
-पंकज जगन्नाथ जयस्वाल अयोध्या, 14 जनवरी | 22 जनवरी, 2024 को दुनिया भर के लाखों लोगों ने **रामलला** की प्राण प्रतिष्ठा में भाग लिया, जिसने **भारत** के आध्यात्मिक पुनर्जागरण की शुरुआत की। **श्री राम** की जन्मभूमि **अयोध्या** सिर्फ एक शहर से कहीं ज़्यादा है; यह एक कालातीत, आध्यात्मिक गूंज है। यह **श्री राम** के धर्म, सत्य, बलिदान और आदर्श जीवन के प्रतीक का प्रतिनिधित्व करता है। **अयोध्या** भारतीय संस्कृति, **सनातन धर्म**, शाश्वत भक्ति और **भारत** को "विश्वगुरु" बनाने के लिए दुनिया में शांति लाने के मार्ग के रूप में एक प्रकाश स्तंभ की तरह खड़ा है, जबकि हाल ही में निर्मित **राम मंदिर** आध्यात्मिक चमक से जगमगा रहा है। श्री राम मंदिर हिंदू दर्शन और संस्कृति की भव्यता को दर्शाता है। इसका विस्तृत डिज़ाइन, जो प्राचीन भारत की कलात्मक और स्थापत्य प्रतिभा का प्रतिनिधित्व करता है, पारंपरिक भारतीय कौशल,...