
जगदलपुर, 03 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के नक्सली‑प्रभावित बस्तर संभाग में सुरक्षा व्यवस्था में एक नई दिशा देखी जा रही है। भीतर‑भूले क्षेत्रों में नक्सली हिंसा से धीरे‑धीरे मुक्त होते हुए, केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती को क्रमिक रूप से घटाया जा रहा है और पूरी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस को सौंपी जा रही है। इस परिवर्तन के तहत बस्तर फाइटर्स और जिला रिजर्व गार्ड की भूमिका को विस्तारित किया जा रहा है।
बस्तर फाइटर्स के कुल 1,588 नए पदों की भर्ती प्रक्रिया 02 नवंबर से शुरू हुई और 12 दिसंबर तक आवेदनों की स्वीकृति ली जाएगी। उम्मीदवार अपने संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक या एसडीओपी कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं, साथ ही पंजीकृत डाक द्वारा भी आवेदन भेजने की सुविधा उपलब्ध होगी। यह भर्ती बद्रीनारायण मीणा, बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक, के अनुसार राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद शुरू की गई है। आगे चलकर चार हजार से अधिक ड्रिजी और बस्तर फाइटर्स के जवानों को थानों में तैनात करने की ठोस योजना बनाई गई है।
सुरक्षा कैंपों के कार्य में भी बड़ा बदलाव आया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नेतानार में शुरू किए गए शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा की शैली को अपनाते हुए, पहले चरण में लगभग 70 कैंपों को नागरिक सुविधाओं के केंद्र में बदल दिया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और विभिन्न सरकारी योजनाओं की सीधी पहुँच सुनिश्चित की जा रही है। दंतेवाड़ा के रेंगानार, मेटापाल, जारम, बड़ेगुडरा तथा नारायणपुर के भटपाल और कुरुषनार कैंपों से केंद्रीय बलों का वापसी शुरू हो चुका है, जहाँ कई इमारतों को अब छात्रावास में परिवर्तित किया गया है।
बस्तर के पूर्व आयजी सुंदरराज पी. के अनुसार, स्थानीय जवान जंगल, पहाड़ी मार्ग और भीतर‑भूले क्षेत्रों की भौगोलिक विशेषताओं से परिचित होते हैं। उनकी स्थानीय भाषा और सामाजिक ताने‑बाने की समझ से ग्रामीणों के साथ संवाद आसान होता है, जिससे पुलिस‑जनता के बीच संपर्क मजबूत होता है। भर्ती में अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनारक्षित और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए नियमानुसार आरक्षण लागू रहेगा, और यह प्रक्रिया बस्तर फाइटर्स आरक्षक सेवा भर्ती नियम 2026 के तहत होगी।
