तेलअवीव। इजरायल के आम चुनाव में कथित विदेशी हस्तक्षेप का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। चुनाव में गड़बड़ी और विदेशी फंडिंग के आरोपों की जांच में अब इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद की भी एंट्री हो गई है। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोसाद विदेश से जुड़े मामलों में शिन बेट (इजरायल सुरक्षा एजेंसी) के अधिकारियों की मदद करेगी। इस पूरे विवाद में कतर और तुर्किए का नाम सामने आ रहा है। आरोप है कि इन देशों ने अरब पार्टियों के पक्ष में मतदान बढ़ाने के लिए कथित तौर पर पैसा खर्च किया। हालांकि, कतर ने इन आरोपों को खारिज किया है।
इजरायल के इस चुनाव में अरब पार्टियां किंगमेकर बनकर उभरी हैं। इजरायली यहूदियों की तुलना में अरब मुस्लिम मतदाताओं की बड़े पैमाने पर मतदान में भागीदारी को लेकर दक्षिणपंथी दलों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पश्चिम एशिया के कुछ देशों ने अरब मतदाताओं को एकजुट करने और चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए फंडिंग की। लगातार उठ रहे आरोपों के बाद केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष जस्टिस नोम सोहलबर्ग ने मामले की जांच के आदेश दिए थे।
क्या इजरायल में हुई वोट चोरी?
इजरायल में लंबे समय से किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पा रहा है। इस चुनाव में भी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड और उनके गठबंधन का प्रदर्शन पिछले चुनावों की तुलना में कमजोर रहा है। दो प्रमुख राजनीतिक धड़ों के बीच मुकाबले में अरब पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
शुरुआत में राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहा यह विवाद बाद में चुनावी धांधली के आरोपों में बदल गया। नेतन्याहू की पार्टी की ओर से अरब पार्टियों पर चुनाव के दौरान रिश्वतखोरी, मतदाताओं को धमकाने, हिंसा और फर्जी दस्तावेजों के जरिए एक से अधिक बार मतदान कराने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये आरोप हैं और जांच के जरिए इनकी पुष्टि होना बाकी है।
विवाद बढ़ने के बाद नेतन्याहू समेत कई नेताओं ने मामले की गहन जांच की मांग की। वहीं, मुख्य विपक्षी नेता यायर लापिड ने इन आरोपों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उनका कहना था कि ये आरोप इतने गंभीर नहीं हैं कि इनके आधार पर चुनाव नतीजों को रोका जाए।
इसके बाद केंद्रीय चुनाव समिति ने स्पष्ट किया कि शिन बेट की जांच का चुनाव परिणामों की घोषणा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नतीजे निर्धारित समय के अनुसार ही जारी किए जाएंगे।
फंडिंग के आरोपों में कतर और तुर्किए का नाम
इस पूरे विवाद में कतर और तुर्किए का नाम प्रमुखता से सामने आया है। नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि विदेशी ताकतों ने अरब नेतृत्व वाली पार्टियों राअम और जॉइंट लिस्ट के पक्ष में चुनावी माहौल प्रभावित करने की कोशिश की।
हिब्रू मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल के कुछ राजनीतिक दलों को संदेह है कि कतर और तुर्किए ने देश में सक्रिय ऐसे संगठनों को आर्थिक मदद दी, जिन्होंने अरब मतदाताओं को मतदान के लिए जुटाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में दोनों देशों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
नेतन्याहू की पार्टी का आरोप है कि विदेशी हस्तक्षेप का मकसद इजरायल में यहूदी दक्षिणपंथी सरकार को कमजोर करना और अरब पार्टियों को किंगमेकर बनाकर देश की सुरक्षा नीतियों को प्रभावित करना था। दूसरी ओर, कतर ने आरोपों से इनकार किया है। अब जांच में मोसाद की भागीदारी से इस मामले को लेकर राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में हलचल बढ़ गई है।
