
मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आज भोपाल में आयोजित बैठक में स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कार्यान्वयन पर निर्देश दिए। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत चल रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके), एनीमिया मुक्त भारत अभियान और आशा कार्यक्रम की समीक्षा की गई।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला चिकित्सालयों में चल रहे जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्रों (डीईआईसी) में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराना और रिक्त पदों पर तुरंत नियुक्ति करनी चाहिए। उन्होंने आरबीएसके 2.0 पोर्टल पर 4डी के अंतर्गत चिन्हित बच्चों की स्क्रीनिंग से लेकर उपचार पूर्ण होने तक की सभी जानकारी अनिवार्य रूप से दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही, बच्चों में स्वास्थ्य समस्याओं और बीमारियों की प्रारंभिक पहचान कर समय पर उपचार सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
एनीमिया मुक्त भारत अभियान के दौरान उप मुख्यमंत्री ने एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) से आग्रह किया कि वे सभी पात्र हितग्राहियों की जांच सुनिश्चित करें। एनीमिया की पुष्टि होने पर निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार उपलब्ध कराने तथा उपचार के बाद नियमित फॉलो‑अप करने का निर्देश दिया। साथ ही, उपचार प्रगति का समुचित अभिलेखीकरण और संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने का भी उल्लेख किया।
आशा कार्यक्रम की समीक्षा में बताया गया कि राज्य में वर्तमान में 63,371 ग्रामीण आशा कार्यकर्ता, 5,051 आशा पर्यवेक्षक और 4,125 शहरी आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं। शहरी क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं की आवश्यकता का आकलन कर आवश्यकतानुसार नई नियुक्तियाँ शीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की प्रभावी उपलब्धता से समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य गतिविधियों को सुदृढ़ किया जा सकेगा और आमजन तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी। बैठक में वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ प्रभाकर तिवारी, डॉ निधि शर्मा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
