
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (इंटरग्लोब एविएशन) ने चालू वित्तीय वर्ष 2026‑27 की (जुलाई‑सितंबर) दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने बताया कि इस अवधि में एकीकृत शुद्ध घाटा लगभग 27 % घटकर 1,879.1 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में घाटा 2,582.1 करोड़ रुपये था।
वित्तीय डेटा के अनुसार, इंटरग्लोब एविएशन की कुल आय इस तिमाही में 24,311.9 करोड़ रुपये तक बढ़ी, जो एक साल पहले की तुलना में 19,599.5 करोड़ रुपये थी। वहीं कुल खर्च में वृद्धि हुई और यह 26,188.4 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। विशेष रूप से, विमान ईंधन पर खर्च 9,996.8 करोड़ रुपये रहा, जो उच्च तेल मूल्य और मौसमी मांग में कमी के कारण बढ़ा।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी विली वॉल्श ने कहा, “सितंबर तिमाही आमतौर पर मौसमी रूप से कमजोर रहती है, ईंधन की कीमतें अत्यधिक रही और भू‑राजनीतिक उथल‑पुथल जारी रही। हम खर्च घटाने के उपाय जारी रखेंगे, पर बड़ी कटौती की उम्मीद नहीं कर सकते।” उन्होंने आगे बताया कि कंपनी की लागत संरचना “बहुत ही दक्ष” है और मजबूत नकदी स्थिति “कई विकल्प” प्रदान करती है। वॉल्श ने कहा, “हमने समझदारी से अपनी क्षमता में कटौती की और यील्ड मैनेजमेंट पर ध्यान दिया, जिससे राजस्व अच्छा रहा, पर बढ़ी हुई लागत की पूरी भरपाई केवल आंशिक रूप से ही हो सकी।”
वॉल्श ने भारतीय विमानन क्षेत्र के दीर्घकालिक अवसरों को “अभी भी बहुत आकर्षक” बताया और कहा कि इंडिगो की प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं, जिसमें क्षमता अनुकूलन, लागत प्रबंधन और सेवा गुणवत्ता सुधार शामिल हैं। इस प्रकार, कंपनी ने घटते घाटे के बावजूद अपने राजस्व वृद्धि को बनाए रखने और भविष्य के विकास के लिए रणनीतिक कदम उठाने की घोषणा की है।
