
रायपुर, 29 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। विक्रम यादव, जो छत्तीसगढ़ की पारंपरिक बांस वाद्य कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले प्रमुख कलाकार थे, आज सुबह 5 बजे उनका निधन हो गया। वे खैरा गांव के रहने वाले थे और कई दिनों से अस्वस्थ थे। उनके निधन से प्रदेश के कला जगत में गहरा शोक व्याप्त है।
वर्ष 1971 में हबीब तनवीर के नया थियेटर से जुड़े विक्रम यादव ने बांस, बांसुरी और बीन वादन में अपनी विशिष्ट प्रतिभा से देश‑विदेश में छत्तीसगढ़ी लोकगीतों को प्रस्तुत किया। उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित कई राष्ट्रीय नेताओं के समक्ष प्रस्तुति दी और विदेशी मंचों पर भी छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक धरोहर को उजागर किया।

2007 में वे अनुपरंजन पांडेय के बस्तर बैंड में शामिल हुए और लोक संगीत के क्षेत्र में अपने योगदान को और विस्तारित किया। अपने कार्यकाल में उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए। वर्ष 2007 में उन्हें भुइयां सम्मान से सम्मानित किया गया, और 2018 में मध्य प्रदेश शासन द्वारा दिया गया राष्ट्रीय तुलसी सम्मान उनके कलाकारित्व की पुष्टि करता है। इसी माह, 4 अक्टूबर को उन्हें साकेत कला साधना सम्मान-2026 से भी नवाजा गया।
उनकी मृत्यु छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंगीत परम्परा के लिए अपूरणीय क्षति है। अंत्यसंस्कार आज सुबह 11 बजे उनके गृह ग्राम खैरा में किया गया, जहाँ हजारों श्रोताओं और सहकर्मियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। स्थानीय कलाकार और जनता ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका संगीत और शिक्षाएँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।
