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सूरजपुर में धान कटाई के बाद दलहन‑तिलहन की खेती को बढ़ावा: कृषि विभाग के उपयोगी उपाय

सूरजपुर, 25 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। सूरजपुर जिले में धान कटाई के बाद दलहन‑तिलहन की खेती को प्रोत्साहित करने हेतु कृषि विभाग ने किसानों को उपलब्ध नमी का उपयोग करके रबी फसलों की बुवाई करने की सलाह दी है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, खरीफ के दौरान जिले में लगभग 1.57 लाख हेक्टेयर भूमि पर फसल उगाई गई, जिसमें 62 % से 65 % क्षेत्र में धान की खेती होती है, जबकि रबी में केवल 35 % से 40 % क्षेत्र पर फसल लगाई जाती है।

वर्तमान में किसान अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर हैं, परन्तु दलहन एवं तिलहन की मांग के लिए बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है। इस निर्भरता को कम करने के लिए विभाग ने उन रबी फसलों का चयन करने की सलाह दी है, जो असिंचित परिस्थितियों में भी सफल हो सकें। धान कटाई के बाद बची नमी का उपयोग करके कम या बिना जुताई के इन फसलों की बुवाई संभव है।

विशेष रूप से, विभाग ने तिवड़ा और बटरी की बुवाई के लिए धान कटाई के 10‑15 दिन पहले खेत में पर्याप्त नमी रहने पर बीज छिड़कने का सुझाव दिया। कम नमी वाले धान‑पड़ती क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर अनुशंसित किस्मों का चयन करना चाहिए। मसूर की खेती के लिए मध्यम भूमि और उचित जल निकास वाले खेतों को चुना जाए, तथा धान कटाई के बाद उपलब्ध नमी के अनुसार न्यूनतम जुताई या बिना जुताई के समय पर बुवाई की जाए।

अलसी की बुवाई के लिए धान की खड़ी फसल में उतेरा पद्धति अपनाई जा सकती है, अथवा कटाई के बाद नमी वाली भूमि में न्यूनतम जुताई का विकल्प उपयोग किया जाए। कुसुम की फसल के लिए मध्यम व भारी भूमि उपयुक्त मानी गई है, और किसानों को नमी के अनुसार बुवाई तथा जल्दी तैयार होने वाली किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई। सरसों व तोरिया की खेती के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल, कम समय में तैयार होने वाली अनुशंसित किस्मों को प्राथमिकता देना आवश्यक बताया गया।

उत्पादन में सुधार के लिये विभाग ने बीजोपचार, संतुलित उर्वरक उपयोग और नमी संरक्षण पर भी जोर दिया। किसान फफूंदनाशक व जैव उर्वरक से बीजों का उपचार करें और फसल के अनुशंसित चरण में ही उर्वरक डालें। असिंचित फसलों में अत्यधिक उर्वरक डालने से बचें तथा जलभराव वाले समय में बुवाई न करें।

अंत में, विभाग ने धान कटाई के बाद बची नमी का अधिकतम उपयोग, कीट‑रोगों की नियमित निगरानी और प्रकोप दिखने पर समन्वित फसल प्रबंधन उपाय अपनाने की सलाह दी है, जिससे किसान रबी में दलहन‑तिलहन का उत्पादन बढ़ा कर अपनी खेती को अधिक विविधतापूर्ण बना सकते हैं।

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