
मऊ, 25 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। एक चौंकाने वाली कहानी सामने आई है, जिसमें राजू उर्फ राजकुमार राजभर ने 2016 में योगेश सिंह की हत्या के आरोप से बचने के लिए खुद को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने अपने परिवार को यह विश्वास दिलाने के लिए बकरे की लाश जला कर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया, जिससे सरकारी अभिलेखों में भी उनका नाम मृतक के रूप में दर्ज हो गया। फिर भी, पुलिस को पकड़ने में उसे 18 महीने से अधिक का समय लगा।
अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि राजू की उम्र लगभग 38 वर्ष थी और वह ख्वाजाहापुर गाँव के स्टेडियम के पास निवासी थे। वह पहले मुंबई में काम करते थे और बाद में शेयर मार्केट ट्रेडिंग व क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े हुए थे। 2016 के मामले में, उन्हें आजीवन कारावास का सामना करना पड़ सकता था, इस भय से उन्होंने अपनी मौत का नाटक किया।
कहा जाता है कि राजू को एक फर्जी तरीके से बेहोश कर अस्पताल भेजा गया और वहाँ से तस्वीरें बनाकर यह दिखाया गया कि वह श्मशान में दफन है। इसके बाद बकरे की देह जलाई गई, ताकि लोगों में उसकी मृत्यु का भ्रम पैदा हो सके। फिर गाजीपुर जनपद में उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया गया।
पुलिस ने बताया कि राजू की ट्रेडिंग में निवेशक के रूप में दो होम्योपैथिक डॉक्टर भी शामिल थे। उनसे पूछताछ जारी है ताकि यह पता चले कि क्या वे फर्जी दस्तावेज़ बनाने में सहायक थे।
राजू की पत्नी को बताया गया था कि उसकी मृत्यु हो गई है और परंपरा के अनुसार तेरहवीं भी हो चुकी थी। उन्हें लगभग 10 लाख रुपये की बीमा राशि प्राप्त हुई। पुलिस इस दावे की जाँच करेगी कि क्या बीमा भुगतान के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र का दुरुपयोग हुआ।
अध्यक्ष ने कहा कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले पर भी कार्रवाई की जाएगी और यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो कड़ी सजा सुनाई जाएगी। इस सनसनीखेज मामले से यह सवाल भी उठता है कि किसने और कैसे राजू की मौत का नाटक संभव किया।
