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FCI ने MP में ₹1160 करोड़ के चावल गबन के दावे का आंकड़ों के साथ किया खंडन… मामले को बताया पूरी तरह भ्रामक

नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में एथेनॉल उत्पादन (Ethanol Production) के लिए भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India-FCI) के चावल के कथित बड़े पैमाने पर डायवर्जन से जुड़ी खबरों पर निगम ने कड़ा रुख अपनाया है. एफसीआई ने एक औपचारिक बयान जारी कर मीडिया में चल रहे 1160 करोड़ रुपये के गबन के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. निगम ने साफ किया है कि करीब 5 लाख मीट्रिक टन (LMT) चावल के गबन की बात पूरी तरह काल्पनिक है, क्योंकि डिस्टिलरियों ने इस पूरे स्टॉक को वैध भुगतान करके खरीदा है।


FCI के अनुसार, एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2024-25 के दौरान मध्य प्रदेश की डिस्टिलरियों को 2.98 एलएमटी चावल 22.50 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया गया था. इसके बाद ईएसवाई 2025-26 में 30 जून 2026 तक 2.41 एलएमटी चावल 23.20 रुपये प्रति किलो की दर से जारी किया गया. इस प्रकार दोनों वर्षों में कुल लगभग 5.39 एलएमटी चावल विधिवत जारी किया गया।


निगम का कहना है कि मीडिया में उल्लेखित 1160 करोड़ रुपये की राशि पूरे 5 एलएमटी चावल के जारी मूल्य के आधार पर निकाली गई है, जिसे डिस्टिलरियों ने एफसीआई को वैध रूप से भुगतान किया है. इसका कथित गबन या डायवर्जन से कोई संबंध नहीं है।


हेराफेरी सिर्फ 490 बोरियों की, MP सरकार ने बैठाई SIT
एफसीआई ने बताया कि वर्तमान जांच पूरे चावल के स्टॉक से संबंधित नहीं है, बल्कि केवल 490 बोरियों यानी 242.50 क्विंटल चावल के कथित डायवर्जन से जुड़ी है. इस मात्रा का अनुमानित मूल्य लगभग 5.63 लाख रुपये है. इसलिए पूरे 5 एलएमटी चावल के मूल्य को कथित अनियमितता से जोड़ना पूरी तरह भ्रामक है।


FCI के अनुसार, अनियमितता का पता सरकारी एजेंसियों ने स्वयं लगाया था और मीडिया रिपोर्ट प्रकाशित होने से पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी गई थी. जून 2026 के पहले सप्ताह में चावल की ढुलाई में गड़बड़ी सामने आने के बाद संबंधित डिस्टिलरी को नोटिस जारी किया गया तथा 5 जून 2026 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई. इसके बाद 11 जून को संयुक्त निरीक्षण दल ने मौके का निरीक्षण कर बरामद चावल की बोरियों और एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के तहत जारी खेपों के बीच प्रारंभिक संबंध स्थापित किया।


एफसीआई ने जांच पूरी होने तक संबंधित डिस्टिलरी की सुरक्षा राशि रोक दी है और उसे आगे चावल आवंटन बंद कर दिया है. वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया है. साथ ही राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने संबंधित राइस मिल पर 44.12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया है. एफसीआई ने कहा कि जांच जारी है और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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