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देशभर में आज धूमधाम से मनाई जा रही आषाढ़ अमावस्या…. नदियों तटों पर उमड़ रही भीड़

नई दिल्ली। देशभर में आज आषाढ़ अमावस्या (Ashadh Amavasya 2026) का पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। नदियों-तालाबों पर पवित्र स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। अमावस्या हिंदू धर्म में एक बहुत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. इस दिन को खास तौर पर पितरों (Ancestors) यानी पूर्वजों को याद करने और उनका सम्मान करने के लिए शुभ माना जाता है. आषाढ़ महीने में आने वाली अमावस्या को आषाढ़ अमावस्या कहा जाता है. इस दिन लोग अपने पितरों की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं. साथ ही, भगवान विष्णु (Lord Vishnu), भगवान शिव (Lord Shiva) और मां लक्ष्मी (मां लक्ष्मी) की कृपा पाने के लिए स्नान और दान भी करना चाहिए।


आषाढ़ अमावस्या शुभ मुहूर्त (Ashadh Amavasya 2026 Shubh Muhurat)
द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या की तिथि 13 जुलाई यानी कल शाम 6 बजकर 49 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर होगा।


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अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त (सुबह): आज सुबह 05 बजकर 32 बजे से लेकर सुबह 08 बजकर 45 बजे तक का समय स्नान और तर्पण के लिए बेहद भाग्यशाली रहेगा.


कुतुप काल
दोपहर 11 बजकर 40 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट बजे तक रहेगा, जिसमें पितरों का पूजन किया भी जा सकता है.


आषाढ़ अमावस्या पूजन विधि
घर के मंदिर या पूर्व दिशा में एक साफ चौकी बिछाएं. उस पर पीले या सफेद रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. फिर, भगवान के सामने शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं. भगवान विष्णु को पीले चंदन का और माता लक्ष्मी को कुमकुम का तिलक लगाएं. भगवान विष्णु को तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) के साथ पीले फल या मिठाई अर्पित करें. इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या “ऊं नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें. अंत में आरती करें.


शाम के समय पीपल के पेड़ के पास जाएं. वहां जल में कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर चढ़ाएं. पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और सात बार परिक्रमा करें.


पितृ तर्पण और श्राद्ध विधि

– तर्पण
हाथ में कुशा और काले तिल लेकर पितरों के नाम से जल अर्पित करें. दक्षिणाभिमुख बैठकर तर्पण करना सबसे उत्तम माना जाता है.

– पितृ भोज
इस दिन सात्विक भोजन बनाएं. भोजन में से पहला हिस्सा गाय, दूसरा कुत्ते, तीसरा कौए, चौथा देवों और पांचवां हिस्सा चींटियों के लिए निकालें.

– ब्राह्मण भोज
संभव हो तो किसी योग्य ब्राह्मण को आदरपूर्वक भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा देकर विदा करें.


आषाढ़ अमावस्या महत्व
अमावस्या हिंदुओं के लिए बहुत ही धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व का दिन होता है. यह दिन पितरों यानी पूर्वजों की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है. इस दिन लोग विभिन्न पूजा-पाठ और धार्मिक विधियों के माध्यम से अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके मोक्ष की कामना करते हैं.


चंद्रमा के प्रभाव के कारण अमावस्या को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर दिन माना जाता है. खासकर आषाढ़ अमावस्या को ऐसा समय माना जाता है, जब पितरों की ऊर्जा सबसे अधिक सक्रिय होती है और उनसे जुड़ना आसान होता है. इस दिन गंगा में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है, इसलिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर स्नान करने जाते हैं.

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