इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य दादागीरी और समंदर के रास्ते परमाणु ताकत के प्रदर्शन ने दुनिया भर की चिंताओं को बढ़ा दिया है. चीन की एक न्यूक्लियर-पावर वाली सबमरीन ने समंदर से लंबी दूरी की एक खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइल का टेस्ट किया है. इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए मेलबर्न में द्विपक्षीय बैठक के दौरान ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानिस और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर विस्तार से चर्चा की और ड्रैगन की इस रणनीतिक चाल पर आपसी चिंता व्यक्त की.
भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इस हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद पुष्टि की कि ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने सीधे तौर पर इस मिसाइल लॉन्च के मुद्दे को उठाया. भारत ने साफ किया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता हर हाल में बनी रहनी चाहिए.
सोलोमन आइलैंड्स के पास गिरा पेलोड
सैन्य विशेषज्ञों और ताइवान के रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, चीन का यह परीक्षण बेहद असामान्य और रणनीतिक था. इस सबमरीन-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) की पहचान JL-2 के रूप में की गई है. आमतौर पर सबमरीन पानी के अंदर से मिसाइल दागती हैं, लेकिन इस बार चीन ने सबमरीन को समंदर की सतह (ऊपर) पर लाकर मिसाइल फायर की. मिसाइल ने करीब 7300 किलोमीटर की दूरी तय की और इसका डमी पेलोड सीधे साउथ पैसिफिक में सोलोमन आइलैंड्स के पास जाकर गिरा. पेंटागन की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पास इस समय 6 न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन का एक एक्टिव बेड़ा है, जिसमें से हर सबमरीन 12 परमाणु मिसाइलें ले जाने में सक्षम है.
पैसिफिक देशों में क्यों मचा है हड़कंप?
चीन के इस गुप्त और अचानक किए गए टेस्ट ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और अमेरिका के गठबंधन को सकते में डाल दिया है. रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस टेस्ट से चीन ने साबित कर दिया है कि वह अपने सुरक्षित और किलेबंद नेवल बेस में बैठे-बैठे ही सीधे अमेरिका को निशाना बना सकता है. ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे क्षेत्र को अस्थिर करने वाला कदम बताया. वहीं जापान ने बीजिंग की इस मिलिट्री एक्टिविटी पर गंभीर चिंता जताई है क्योंकि जापान को इसकी सूचना लॉन्चिंग के कुछ घंटे पहले ही दी गई थी.
गठबंधन पर दबाव बनाने की कोशिश
लाइल मॉरिस (सीनियर फैलो, एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट ने कहा कि इतनी लंबी दूरी का टेस्ट एक बहुत बड़ा डेवलपमेंट है. यह साफ दिखाता है कि चीन समंदर के रास्ते एक ऐसी परमाणु क्षमता विकसित कर रहा है जिसे नष्ट करना मुश्किल है और जो बहुत लंबी दूरी तक मार कर सकती है. एशिया सोसाइटी की डायरेक्टर एम्मा चैनलेट-एवरी का मानना है कि यह लॉन्च सीधे तौर पर अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को चीन का एक खुला शक्ति प्रदर्शन है. चीन खास तौर पर उस समय अपने गठबंधन और सैन्य ताकत को मजबूत कर रहा है, जब वैश्विक स्तर पर अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधनों पर कुछ दबाव देखा जा रहा है.
