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समाज की परंपराओं से आगे बढ़ी मिसाल: मध्य प्रदेश के युवक ने किन्नर साथी से लिए सात फेरे, चर्चा में आई अनोखी शादी

जयपुर। राजस्थान के बारां जिले में हुई एक शादी इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। मध्य प्रदेश के एक युवक ने राजस्थान की किन्नर साथी के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। इस विवाह को लेकर स्थानीय स्तर पर सामाजिक स्वीकार्यता, समानता और रिश्तों की नई सोच पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

जानकारी के अनुसार, बारां जिले के शाहाबाद उपखंड के देवरी गांव की रहने वाली किन्नर सोनू उर्फ रेशमा और मध्य प्रदेश के गुना जिले के कोलीपुरा निवासी सागर राजपूत पिछले लगभग एक वर्ष से एक-दूसरे के संपर्क में थे। इस दौरान दोनों के बीच विश्वास और अपनापन बढ़ा और समय के साथ उनका रिश्ता विवाह तक पहुंच गया।

समाज की परवाह छोड़ लिया साथ निभाने का फैसला

बताया जा रहा है कि सागर ने जब रेशमा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, तो उन्होंने शुरुआत में समाज की प्रतिक्रिया और लोगों की सोच को लेकर संकोच जताया। हालांकि सागर ने भरोसा दिलाया कि उनके लिए रिश्ते की सच्चाई और एक-दूसरे का साथ सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इसके बाद दोनों ने परिवार और करीबी लोगों की सहमति से विवाह करने का निर्णय लिया।

मंदिर में वैदिक रीति से संपन्न हुआ विवाह

शाहाबाद कस्बे के एक मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों का विवाह संपन्न हुआ। पंडित लखन लाल शर्मा ने हिंदू परंपरा के अनुसार सभी वैवाहिक रस्में पूरी कराईं। अग्नि को साक्षी मानकर सागर और रेशमा ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर रेशमा के परिवार के सदस्य, किन्नर समुदाय के लोग तथा दोनों के करीबी मित्र मौजूद रहे। सभी ने नवदंपती को शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।

रेशमा बोलीं- पहचान इंसानियत से होनी चाहिए

विवाह के बाद रेशमा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सागर ने उनसे शादी करके यह संदेश दिया है कि किसी व्यक्ति की पहचान उसकी सामाजिक श्रेणी से नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व, व्यवहार और रिश्तों से होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समाज की सोच में बदलाव आने पर किन्नर समुदाय को भी सम्मान और बराबरी का स्थान मिलेगा।

सामाजिक स्वीकार्यता की मिसाल बनी शादी

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि समाज में समानता, सम्मान और मानवीय संवेदनाओं को स्वीकार करने का भी संदेश देता है। यही कारण है कि यह अनोखी शादी बारां ही नहीं, आसपास के इलाकों में भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

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