हरियाणा के किसान पराली नहीं जलाएँगे, परंतु भुगतान में कमी
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। सीईईडब्ल्यू द्वारा जनवरी से मार्च 2026 के बीच हरियाणा के 12 जिलों के 144 ग्रामों में 1,588 किसानों के बीच किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, 80 % किसान पराली जलाने से बचने के इच्छुक हैं। परंतु सिर्फ 7 % को ही खरीदारों से भुगतान मिला है, 62 % पराली को मुफ्त में दे देते हैं और 31 % को खेत साफ कराने में प्रति एकड़ लगभग रु. 1,000 खर्च करने पड़ते हैं।
अध्ययन में पाया गया कि किसान तीन तरीकों से पराली का प्रबंधन करते हैं: 39 % पशु आहार के रूप में इस्तेमाल करते हैं, 38 % गांठें बनवाते हैं, और 32 % सुपर सीडर जैसी मशीन से खेत में ही अवशेष मिलाते हैं। 80 % किसान जो पराली को गांठ बनवाते या आहार के रूप में इस्तेमाल करते हैं, 2026 में भी इन तरीकों को जारी रखने का इरादा रखते हैं। 6 % ने स्वीकार किया कि वे पराली जलाते हैं, जबकि 26 % ने अपने गांवों में पराली जलाने की सूचन...

